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BIHAR BHUMI : अब नहीं चलेगा बहाना! बिहार सरकार ने बदल दिए दाखिल-खारिज के नियम, अफसरों की बढ़ेगी टेंशन

पटना में बिहार सरकार ने भूमि से जुड़े दाखिल-खारिज मामलों में हो रही अनावश्यक देरी को समाप्त करने के लिए बड़ा और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब “सक्षम न्यायालय” और “लंबित” शब्द की स्पष्ट परिभाषा तय कर दी गई है, जिससे मामलों के निपटारे में तेजी आएगी और

BIHAR BHUMI : अब नहीं चलेगा बहाना! बिहार सरकार ने बदल दिए दाखिल-खारिज के नियम, अफसरों की बढ़ेगी टेंशन
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BIHAR BHUMI : बिहार में दाखिल-खारिज (भूमि म्यूटेशन) मामलों में लंबे समय से हो रही देरी और अलग-अलग व्याख्याओं के कारण उत्पन्न भ्रम को खत्म करने के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य के उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने इस संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं।


उन्होंने बताया कि बिहार भूमि दाखिल-खारिज अधिनियम, 2011 की धारा 6(12) में प्रयुक्त “सक्षम न्यायालय में लंबित” शब्द की अलग-अलग व्याख्या के कारण कई अंचलों में दाखिल-खारिज मामलों का निपटारा समय पर नहीं हो पा रहा था। इस समस्या को देखते हुए विभाग ने विस्तृत समीक्षा कर सभी राजस्व अधिकारियों के लिए स्पष्ट नियम निर्धारित किए हैं।


नए निर्देशों के अनुसार अब “सक्षम न्यायालय” की श्रेणी में केवल दीवानी/व्यवहार न्यायालय (Civil Court), पटना उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय ही नहीं, बल्कि डीसीएलआर, एडीएम, डीएम, कमिश्नर कोर्ट, विधि विभाग द्वारा अधिकृत न्यायालय तथा बिहार भूमि न्यायाधिकरण (BLT) को भी शामिल किया गया है। इससे न्यायिक प्रक्रिया की स्पष्टता बढ़ेगी और अधिकारियों को निर्णय लेने में सुविधा होगी।


सरकार ने “लंबित” शब्द की भी स्पष्ट व्याख्या की है। अब केवल वही मामला लंबित माना जाएगा जो विधिवत न्यायालय में दायर हो चुका हो, जिसमें न्यायालय ने संज्ञान (Admission) लिया हो, नोटिस जारी किया गया हो या कोई स्थगन आदेश (Stay Order), अंतरिम आदेश या निषेधाज्ञा प्रभावी हो। केवल आवेदन, आपत्ति या सामान्य अभ्यावेदन दाखिल होने मात्र को “लंबित” नहीं माना जाएगा।


उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट किया कि यदि किसी सक्षम न्यायालय का कोई स्थगनादेश लागू नहीं है, तो राजस्व अधिकारी अपनी कार्रवाई जारी रखेंगे और दाखिल-खारिज मामलों को अनावश्यक रूप से रोककर नहीं रखा जाएगा। इसके साथ ही यदि किसी वाद की प्रमाणित प्रति में स्वीकारण (Admission) दर्ज नहीं है, तो उसे भी लंबित श्रेणी में नहीं रखा जाएगा।


इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य भूमि मामलों में पारदर्शिता लाना और वास्तविक क्रेताओं को अनावश्यक कानूनी और प्रशासनिक परेशानियों से राहत देना है। लंबे समय से देखा जा रहा था कि कई मामलों में अस्पष्ट नियमों के कारण दाखिल-खारिज प्रक्रिया अनावश्यक रूप से रुक जाती थी, जिससे आम लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था।


सरकार ने सभी अंचल अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे नए दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करें। साथ ही यह सुनिश्चित करें कि राजस्व प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्ध सेवा प्रणाली लागू हो।इस कदम से उम्मीद की जा रही है कि बिहार में भूमि विवादों का समाधान तेजी से होगा और दाखिल-खारिज मामलों का निपटारा अब पहले की तुलना में अधिक सरल, तेज और पारदर्शी हो जाएगा।

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Tejpratap

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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