Bihar News : बिहार में मध्य पूर्व में जारी तनाव और संभावित युद्ध के दुष्प्रभावों को देखते हुए राज्य सरकार ने एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इसी कड़ी में एक उच्चस्तरीय क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप (आपदा प्रबंधन समूह) का गठन किया गया है, जिसका उद्देश्य राज्य में खाद्य, ऊर्जा और प्रवासी मजदूरों से जुड़ी चुनौतियों से निपटना है।
इस समूह का गठन राज्य के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में किया गया है। इसके साथ ही 12 महत्वपूर्ण विभागों के सचिवों को भी इस ग्रुप में शामिल किया गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित और समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा शनिवार को जारी आदेश में इसकी औपचारिक घोषणा की गई।
सरकार ने खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के सचिव को इस समूह का नोडल पदाधिकारी नियुक्त किया है, जबकि दिल्ली स्थित स्थानिक आयुक्त को विभिन्न एजेंसियों और विभागों के बीच समन्वय की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि राज्य और केंद्र के बीच बेहतर तालमेल बना रहे, खासकर तब जब अंतरराष्ट्रीय हालात का सीधा असर आम लोगों की जिंदगी पर पड़ सकता है।
दरअसल, मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक स्तर पर पेट्रोलियम उत्पादों और खाद्य आपूर्ति पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। बिहार जैसे राज्य, जहां बड़ी संख्या में लोग रोजमर्रा की जरूरतों के लिए बाजार पर निर्भर हैं, वहां किसी भी तरह की आपूर्ति बाधित होने से स्थिति गंभीर हो सकती है। इसे ध्यान में रखते हुए यह ग्रुप राज्य में आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा।
क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप का एक अहम फोकस पश्चिम एशिया में रह रहे बिहार के प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा पर भी रहेगा। हजारों की संख्या में बिहारी मजदूर खाड़ी देशों में काम करते हैं। युद्ध या अस्थिरता की स्थिति में उनके सामने रोजगार, सुरक्षा और वापसी जैसी समस्याएं खड़ी हो सकती हैं। ऐसे में यह समूह उनके लिए आवश्यक सहायता और समन्वय का काम करेगा।
इसके अलावा, अगर बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर बिहार लौटते हैं, तो उनके लिए रोजगार की व्यवस्था करना भी एक बड़ी चुनौती होगी। इस स्थिति से निपटने के लिए श्रम संसाधन विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों को पहले से ही कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि लौटने वाले मजदूरों को जल्द से जल्द काम मिल सके और उनकी आजीविका प्रभावित न हो।
इस समूह में विकास आयुक्त, गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, कृषि, नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिवों के साथ-साथ सहकारिता, श्रम संसाधन, खाद्य एवं उपभोक्ता, ऊर्जा, परिवहन और आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव शामिल हैं। इससे यह सुनिश्चित किया गया है कि हर जरूरी क्षेत्र की निगरानी और निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी हो।
राज्य सरकार का यह कदम दिखाता है कि वह संभावित संकट को लेकर सतर्क है और समय रहते तैयारी कर रही है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय हालात के अनुसार इस ग्रुप की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो सकती है।






