1st Bihar Published by: First Bihar Updated May 15, 2026, 1:41:50 PM
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Bihar News: बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लाखों लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। वर्षों से चर्चा में रही आरा-बलिया रेल लाइन परियोजना अब धीरे-धीरे जमीन पर उतरती दिखाई दे रही है। करीब 2300 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस महत्वाकांक्षी रेल परियोजना का फाइनल लोकेशन सर्वे (FLS), ड्रोन मैपिंग और डीपीआर तैयार कर रेलवे मंत्रालय को भेज दिया गया है। अब लोगों की नजर अगले चरण यानी टेंडर और निर्माण प्रक्रिया पर टिकी हुई है।
यह रेल लाइन बनने के बाद बिहार के भोजपुर और यूपी के बलिया के बीच संपर्क काफी आसान हो जाएगा। सबसे बड़ी बात यह है कि आरा और बलिया के बीच की दूरी करीब 40 किलोमीटर तक कम हो सकती है। इससे यात्रा का समय घटेगा और दियारा क्षेत्र के हजारों लोगों को सीधा रेल कनेक्शन मिल सकेगा।
जानकारी के मुताबिक प्रस्तावित रेल लाइन बलिया जिले के रघुनाथपुर इलाके से शुरू होकर कई गांवों और दियारा क्षेत्रों से गुजरते हुए गंगा नदी पार करेगी और फिर भोजपुर जिले में प्रवेश कर आरा रेल नेटवर्क से जुड़ जाएगी। इस रूट को तय करने के दौरान तकनीकी विशेषज्ञों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। कुछ इलाकों में दलदली जमीन मिलने के कारण पहले से तय रूट में बदलाव भी करना पड़ा।
इस परियोजना की खास बात यह है कि इसमें आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। हैदराबाद की विशेषज्ञ टीम ने ड्रोन सर्वे, 3D मैपिंग, जीपीएस तकनीक और जमीन की वैज्ञानिक जांच के जरिए पूरा सर्वे तैयार किया है। रेलवे बोर्ड को भेजी गई रिपोर्ट में दो प्रमुख नदियों पर एलिवेटेड रेल पुल बनाने का भी प्रस्ताव शामिल है, ताकि बाढ़ और जलभराव वाले इलाकों में भी रेल परिचालन सुरक्षित तरीके से हो सके।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस रेल लाइन की मांग दशकों पुरानी है। बताया जाता है कि 1960 के दशक से ही इस परियोजना को लेकर आवाज उठती रही है। साल 2009 के रेल बजट में भी इसका जिक्र हुआ था, लेकिन लंबे समय तक यह योजना फाइलों में ही अटकी रही। अब एक बार फिर इस पर तेजी से काम शुरू होने के बाद लोगों में उम्मीद जगी है कि सपना जल्द हकीकत बन सकता है।
इस रेल लाइन से दियारा क्षेत्र के लोगों को सबसे ज्यादा फायदा मिलने की उम्मीद है। किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में आसानी होगी। वहीं छात्रों, नौकरीपेशा लोगों और व्यापारियों के लिए सफर तेज और सस्ता हो जाएगा। इसके अलावा इलाके में व्यापार, रोजगार और छोटे उद्योगों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना जताई जा रही है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार तकनीकी और इंजीनियरिंग प्रक्रियाएं लगभग पूरी कर ली गई हैं। अब अंतिम मंजूरी और टेंडर प्रक्रिया के बाद निर्माण कार्य शुरू हो सकता है।