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Bihar News : भरत तिवारी के बाद भागलपुर एनकाउंटर साजिश पर हाईकोर्ट का बड़ा एक्शन! DGP, SP और जेल अधीक्षक से जवाब तलब

भागलपुर कथित एनकाउंटर साजिश मामले में पटना हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए DGP, SP, जेल अधीक्षक और अन्य अधिकारियों से जवाब मांगा है। जानें पूरा मामला।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jul 03, 2026, 8:22:51 AM

Bihar News : भरत तिवारी के बाद भागलपुर एनकाउंटर साजिश पर हाईकोर्ट का बड़ा एक्शन! DGP, SP और जेल अधीक्षक से जवाब तलब

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Bihar News : बिहार में कथित फर्जी एनकाउंटर के मामलों को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब भागलपुर से जुड़े एक मामले पर पटना हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय ने भागलपुर सेंट्रल जेल से जमानत पर रिहा हुए अविनाश श्रीवास्तव के कथित अपहरण और एनकाउंटर की साजिश से जुड़े आरोपों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है। अदालत ने भागलपुर जेल अधीक्षक, पटना के चौक थाना प्रभारी और मामले से जुड़े एक दारोगा को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया है।


इसके अलावा बिहार के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), जेल महानिरीक्षक (आईजी जेल) तथा पटना के पुलिस अधीक्षक (एसपी) से भी इस मामले में विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा गया है। कोर्ट ने अधिकारियों को जवाब तैयार करने के लिए समय देते हुए अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की है।


पत्नी की याचिका पर हुई सुनवाई

यह मामला अविनाश श्रीवास्तव की पत्नी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि उनके पति को जमानत पर जेल से रिहा होने के तुरंत बाद कुछ लोगों ने जबरन उठा लिया और बाद में पुलिस की मदद से उन्हें अलग-अलग स्थानों पर ले जाकर कथित एनकाउंटर की योजना बनाई गई। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ओम प्रकाश कुमार ने अदालत में पक्ष रखा और दावा किया कि पूरी घटना सुनियोजित थी। उनका कहना था कि यदि समय रहते मामला सामने नहीं आता तो अविनाश श्रीवास्तव की जान भी जा सकती थी।


जेल से निकलते ही कथित अपहरण का आरोप

याचिका के अनुसार, 29 नवंबर 2025 की सुबह अविनाश श्रीवास्तव भागलपुर सेंट्रल जेल से जमानत पर रिहा हुए थे। आरोप है कि जेल के मुख्य द्वार से बाहर निकलते ही सादे कपड़ों में मौजूद दो लोगों ने उनके साथ मारपीट की और उन्हें जबरन एक वाहन में बैठाकर ले गए।


इसके बाद उन्हें बरौनी और सबलपुर थाना क्षेत्र की ओर ले जाया गया। याचिका में दावा किया गया है कि इस दौरान पुलिसकर्मी कथित एनकाउंटर के लिए उपयुक्त स्थान तलाश रहे थे। बाद में उन्हें पटना सिटी स्थित चौक थाना के पिछले रास्ते से अंदर ले जाया गया।


हथियार रखने और बयान दिलाने का आरोप

याचिका में आगे आरोप लगाया गया है कि एक दिसंबर की आधी रात अविनाश श्रीवास्तव को रेलवे ओवरब्रिज के पास ले जाया गया। वहां उनकी जेब में जबरन गोलियां रखी गईं और कमर में एक देशी कट्टा लगाया गया। इसके बाद उन्हें जान से मारने की धमकी देकर अपराध स्वीकार करने के लिए मजबूर किया गया।


याचिका के मुताबिक दबाव बनाकर उनका वीडियो भी रिकॉर्ड कराया गया, जिसमें उनसे कथित स्वीकारोक्ति कराई गई। इन आरोपों की सत्यता की जांच अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है।


अधिकारियों से मांगा गया जवाब

पटना हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य के वरिष्ठ पुलिस और जेल अधिकारियों से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय के भीतर अपना जवाब दाखिल करना होगा। साथ ही जिन अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है, उन्हें अगली सुनवाई में कोर्ट के समक्ष उपस्थित रहना होगा।


एनकाउंटर मामलों पर बढ़ी संवेदनशीलता

बिहार में हाल के दिनों में कथित पुलिस एनकाउंटर को लेकर लगातार बहस छिड़ी हुई है। ऐसे मामलों में पुलिस कार्रवाई की निष्पक्षता और कानूनी प्रक्रिया के पालन को लेकर सवाल उठते रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में भागलपुर से जुड़े इस मामले पर हाईकोर्ट की सख्ती को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


अब सभी की नजर अगली सुनवाई पर रहेगी, जहां राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों की ओर से दाखिल जवाब के आधार पर अदालत आगे की कार्रवाई तय करेगी। फिलहाल कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए विस्तृत जवाब और संबंधित अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।