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Air pollution in Bihar: बिहार सरकार एक बार फिर हुई फेल... वायु प्रदूषण का चिंताजनक स्तर, सरकार की कोशिशें नाकाम

Air pollution in Bihar: बिहार में लगातार वायु प्रदूषण बढ़ रहा है .ऐसे में वायु गुणबत्ता को लेकर एक रिपोर्ट आयी है ,जिससे बिहार सरकार की कलई खुल गयी है.

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प्रतीकात्मक तस्वीर
© Google
Viveka Nand
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Air pollution in Bihar: देश में वायु प्रदूषण को कंट्रोल  करने के लिए किए गए सरकारी प्रयासों के बावजूद, बिहार के लिए एक और शर्मनाक आकड़ा सामने आया है।


आईक्यूएयर की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के 50 सबसे प्रदूषित शहरों में बिहार के 7 शहर शामिल हैं। इनमें भागलपुर, अररिया, पटना, हाजीपुर, छपरा, सहरसा और मुजफ्फरपुर का नाम प्रमुखता से आया है। इस रिपोर्ट को वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों और उनके प्रभाव का एनालिसिस करने के बाद इसे जारी किया गया है।

भागलपुर सबसे अधिक प्रदूषित

एक रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि बिहार के 11 शहर इस साल जनवरी में देश के दैनिक शीर्ष-10 सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में कम से कम एक बार जरूर शामिल हुए। इनमें भागलपुर 28 बार, सहरसा 21 बार, छपरा 13 बार, राजगीर 8 बार, अररिया 7 बार, आरा 6 बार, पटना 4 बार, किशनगंज, पूर्णिया, समस्तीपुर और मुजफ्फरपुर 1-1 बार इस सूची में रहे।

सरकार की नीतियां असफल, प्रदूषण नियंत्रण में लापरवाही

रिपोर्ट के अनुसार, बीते एक वर्ष में इन शहरों में 346 दिन वायु गुणवत्ता मानकों से नीचे रही। यह भी सामने आया कि बिहार के ये शहर अभी तक केंद्र सरकार की राष्ट्रीय स्वच्छ वायु योजना (NCAP) का हिस्सा नहीं हैं। इस योजना के लागू हुए करीब  पांच साल पूरे होने को है हालाँकि , सरकार अब तक अपने निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने में असफल रही है। योजना में तय लक्ष्यों को पूरा न करने पर किसी भी तरह की  जिम्मेवारी फिक्स न होने  के प्रावधान के कारण सरकारी तंत्र में लापरवाह रही ,लिहाजा सही से काम नही हुआ जिससे प्रदूषण नियंत्रण की प्रक्रिया धीमी पड़ी।

WHO के मानकों से बेहद गंदा है  बिहार की हवा    

आपको बता दे की ,साल 2023 में बिहार के इन 11 शहरों में से 90% दिनों की वायु गुणवत्ता विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों से खराब पाई गई। राष्ट्रीय मानकों की तुलना में भी इन शहरों की वायु गुणवत्ता 70% दिनों तक खराब रही। केवल सासाराम और मंगुराहा (वाल्मीकि टाइगर रिजर्व) ऐसे क्षेत्र रहे, जहां 50% दिनों की वायु गुणवत्ता राष्ट्रीय मानकों के अनुसार संतोषजनक थी।

सरकार की उदासीनता और उचित कार्रवाई की कमी की वजह से बिहार में बढ़ता वायु प्रदूषण न केवल पर्यावरण बल्कि जनता के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बनता जा रहा है।ऐसे में अब देखना ये होगा की बिहार सरकार आगे क्या कदम उठाती है |

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रिपोर्टर / लेखक

Viveka Nand

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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