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जातिगत जनगणना पर फिर बोले सुशील मोदी, केंद्र के लिए तो संभव नहीं पर राज्य सरकार चाहे तो करा सकती है

PATNA: जातीय जनगणना और बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने के मामले को लेकर बिहार में इन दिनों राजनीति तेज हो गयी है। सत्ता पक्ष हो या विपक्ष सभी इस पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे

जातिगत जनगणना पर फिर बोले सुशील मोदी, केंद्र के लिए तो संभव नहीं पर राज्य सरकार चाहे तो करा सकती है
Jitendra Vidyarthi
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PATNA: जातीय जनगणना और बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने के मामले को लेकर बिहार में इन दिनों राजनीति तेज हो गयी है। सत्ता पक्ष हो या विपक्ष सभी इस पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। इसी क्रम में आज बुधवार को बीजेपी सांसद सुशील कुमार मोदी का बयान सामने आया है। सुशील मोदी ने एक बार फिर जातिगत जनगणना पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। पूर्व डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने साफ तौर पर कहा है कि केंद्र सरकार के लिए जातीय जनगणना कराना संभव नहीं लेकिन यदि राज्य सरकार चाहे तो इसे करा सकती है। वही आरजेडी पर हमला बोलते हुए कहा कि राजद के जो लोग कहते है कि बस एक कॉलम जोड़ देना है। लेकिन उन्हें यह मालूम नहीं कि एक कॉलम को जोड़ने से कुछ नहीं होगा। क्योंकि इस बार देश में जनगणना डिजिटल तरीके से होगी।


बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री व बीजेपी के सांसद सुशील कुमार मोदी आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर पटना में आयोजित पखवारा में शामिल हुए। इस कार्यक्रम में शामिल होने के बाद उन्होंने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि जातीय जनगणना को लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट फाइल की।  जिसमें कहा गया कि केंद्र सरकार के लिए जातिगत जनगणना कराना व्यवहारिक नहीं है। क्योंकि इस बार की जातीय जनगणना डिजिटल तरीके से होने वाली है। जनगणना की पूरी तैयारी तीन साल पहले ही शुरू हो जाती है। जिसका मैनुअल भी प्रिंट हो चुका है। टाइम टेबल भी बनकर तैयार है और ट्रेनिंग का काम भी शुरू हो चुका है।  


सुशील मोदी ने कहा कि 2011 में जब आर्थिक जातीय जनगणना की गयी थी तब 46 लाख जातियों की सूचना मिली। जबकि इस देश में मुश्किल से आठ हजार जातियां होगी। इसलिए केंद्र सरकार ने कहा कि जनगणना की पूरी तैयारी हो चुकी है। इस अंतिम समय में पिछड़े वर्गों की जनगणना कराना केंद्र सरकार के लिए संभव नहीं। लेकिन यदि कोई राज्य जातिगत जनगणना कराना चाहे तो करा सकती है। जिस प्रकार तेलंगाना और कर्नाटक ने कराया था।


उन्होंने यह भी बताया कि कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार ने यह सर्वेक्षण कराया था लेकिन आज तक वह रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हो पाई है। उड़ीसा की सरकार भी इसकी तैयारी में जुटी हुई है। सुशील मोदी ने कहा कि यदि कोई राज्य सरकार जातीय जनगणना कराना चाहे तो स्वतंत्र हैं। क्यों कि केंद ने अपनी असमर्थता जाहिर कर दी है। सुशील मोदी ने आरजेडी पर हमला बोलते हुए कहा कि राजद के जो लोग कहते है कि बस एक कॉलम जोड़ देना है। लेकिन उन्हें यह मालूम नहीं कि एक कॉलम को जोड़ने से कुछ नहीं होगा। क्योंकि इस बार देश में डिजिटल तरीके से जनगणना की जाएगी।

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Jitendra Vidyarthi

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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