Railway Employee Festival: उत्तर प्रदेश में कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर करवा चौथ की रात एक अनोखा नजारा देखने को मिला। लोको पायलट महेश कुमार को करवा चौथ पर छुट्टी नहीं मिली थी। इस दौरान उनकी पत्नी माया कुरील प्लेटफार्म पर पहुंची और वहीं अपने पति के साथ व्रत मनाया। महिला ने पूजा की थाली लेकर चलनी से महेश कुमार का चेहरा देखा और पति के पांव छूकर आशीर्वाद लिया। इसके बाद पति ने पत्नी को पानी पिलाकर व्रत पूरा कराया। इस दौरान प्लेटफार्म पर गुजरती ट्रेनों और अनाउंसमेंट की आवाजों के बीच यह दृश्य किसी ने वीडियो में कैद कर लिया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
वीडियो में देखा जा सकता है कि महेश कुमार लोको पायलट प्लेटफार्म पर वॉकी-टॉकी लेकर अपने ड्यूटी क्षेत्र में हैं। पत्नी माया कुरील अपने हाथ में चलनी लेकर उन्हें देख रही हैं। स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक की चालक लॉबी में पत्नी ने पूजा की थाली सजाई और पति को देखकर आरती उतारी। वीडियो में ट्रेन और स्टेशन की आवाजाही भी सुनाई दे रही है। महेश कुमार ने बताया कि उन्हें छुट्टी नहीं मिली थी, और वह अपनी ड्यूटी में लगे थे, इसलिए पत्नी ने अपनी मर्जी से स्टेशन आकर करवा चौथ मनाया।
महेश कुमार के अनुसार, उनकी ड्यूटी शुक्रवार को दोपहर 2 बजे से रात 10 बजे तक थी। ड्यूटी खत्म होने के बाद चार्ज देने और ट्रैक्शन फोरमैन की जिम्मेदारी संभालने में लगभग डेढ़ से दो घंटे लग जाते। इस कारण वह घर समय पर नहीं पहुंच सकते थे। पत्नी माया कुरील का कहना था कि उन्होंने अपने पति की ड्यूटी को देखते हुए खुद ही स्टेशन आकर पूजा और व्रत पूर्ण किया।
एनसीआर पीआरओ अमित सिंह ने बताया कि लोको पायलट महेश कुमार ने ड्यूटी के साथ पारिवारिक जिम्मेदारी निभाते हुए मिसाल पेश की। यह घटना दिखाती है कि कर्मचारी अपनी ड्यूटी के दौरान भी परिवार और परंपराओं को महत्व देते हैं। रेलवे कर्मचारियों ने वीडियो देखकर इसकी सराहना की।
इस वीडियो के वायरल होने के बाद लोगों ने सोशल मीडिया पर इसे बेहद प्यारा और प्रेरणादायक बताया। कई लोगों ने कहा कि यह आधुनिक जीवन में पारंपरिक मूल्यों और परिवार के महत्व को दर्शाता है। प्लेटफार्म पर ट्रेन ड्राइवर की पत्नी द्वारा पूजा और आरती करना यह साबित करता है कि सुरक्षा और कर्तव्य के साथ-साथ पारिवारिक और सांस्कृतिक मूल्यों का पालन भी संभव है।
यह घटना केवल एक पारिवारिक क्षण नहीं है, बल्कि रेलवे कर्मचारियों की प्रतिबद्धता और परिवार के प्रति प्रेम का प्रतीक भी है। ट्रेन संचालन की जिम्मेदारी निभाते हुए महेश कुमार और उनकी पत्नी का यह समर्पण दर्शाता है कि कठिन ड्यूटी और त्योहार को संतुलित करना संभव है। इस घटना ने अन्य कर्मचारियों और यात्रियों के बीच भी सकारात्मक संदेश दिया कि कर्तव्य और परंपरा दोनों का सम्मान किया जा सकता है। यह करवा चौथ का अनुभव न केवल महेश कुमार और माया कुरील के लिए यादगार रहा, बल्कि रेलवे प्लेटफार्म पर इसे देखने वाले अन्य यात्रियों के लिए भी एक अनोखा और प्रेरणादायक पल बन गया।




