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Voter ID Controversy: एक व्यक्ति,एक वोटर ID! चुनाव आयोग ने दोहराया नियम, उल्लंघन पर होगी कार्रवाई

Voter ID Controversy: भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट किया है कि किसी भी व्यक्ति के पास दो या अधिक मतदाता पहचान पत्र नहीं होने चाहिए।

Voter ID Controversy
मतदाता पहचान पत्र
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PRIYA DWIVEDI
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Voter ID controversy: भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट किया है कि किसी भी व्यक्ति के पास दो या अधिक मतदाता पहचान पत्र (EPIC कार्ड) नहीं होने चाहिए। यह कार्रवाई कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा और अन्य लोगों के खिलाफ कथित रूप से दो वोटर आईडी कार्ड रखने की शिकायतों के बाद सामने आई है। 


दरअसल, आयोग ने इसे जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत एक दंडनीय अपराध करार दिया है, जिसमें एक वर्ष तक की सजा, जुर्माना, या दोनों का प्रावधान है। चुनाव आयोग ने उन सभी व्यक्तियों से अपील की है, जिनके पास एक से अधिक वोटर आईडी कार्ड हैं, कि वे तुरंत केवल एक वैध पहचान पत्र रखें और बाकी को रद्द करने के लिए फॉर्म 7 भरकर आयोग को सूचित करें। यह फॉर्म मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए प्रयोग होता है और इसे ऑनलाइन भी भरा जा सकता है।


वहीं, मंगलवार को चुनाव आयोग ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को नोटिस जारी किया,जिसमें आरोप है कि उनके पास नई दिल्ली और जंगपुरा विधानसभा क्षेत्रों के तहत दो अलग-अलग मतदाता पहचान पत्र हैं। यह नोटिस उसी दिन जारी किया गया, जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने खेड़ा पर यह आरोप सार्वजनिक रूप से लगाया था। आयोग ने उनसे सोमवार सुबह 11 बजे तक इस पर जवाब मांगा है।


पवन खेड़ा ने चुनाव आयोग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए प्रतिक्रिया में कहा, “मैंने 2016 में घर बदलने के बाद फॉर्म 7 भरकर अपना नाम नई दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र से हटवाने का अनुरोध किया था। इसके बाद भी मेरा नाम उसी सूची में मौजूद है।” उन्होंने आगे कहा कि तब से अब तक चार चुनाव हो चुके हैं – 2019 लोकसभा, 2020 विधानसभा, 2024 लोकसभा, और 2025 विधानसभा। ऐसे में यह मान लेना उचित होगा कि चार संशोधन भी हुए होंगे, फिर भी नाम न हटना आयोग की लापरवाही दर्शाता है।


भाजपा ने बाद में पवन खेड़ा की पत्नी पर भी एक से अधिक एक्टिव वोटर आईडी रखने का आरोप लगाया। वहीं, नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) ने बुधवार को कई अन्य लोगों को भी नोटिस भेजे हैं और उनसे इस मुद्दे पर सफाई मांगी गई है। चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि सभी नोटिस फॉर्म 7 के तहत प्राप्त शिकायतों के आधार पर भेजे गए हैं। उन्होंने कहा, “अगर किसी व्यक्ति के पास दो या उससे अधिक EPIC कार्ड हैं, तो यह कानून का उल्लंघन है। ऐसे लोगों को तुरंत एक पहचान पत्र को चुनकर बाकी को हटाना होगा।”


चुनाव आयोग ने फिर स्पष्ट किया है कि एक व्यक्ति के पास एक समय में केवल एक ही वोटर आईडी कार्ड हो सकता है। अगर किसी कारणवश व्यक्ति का पता बदलता है या प्रविष्टियों में संशोधन करना होता है, तो उसे फॉर्म 8 भरना होगा, जो स्थानांतरण, सुधार, या अन्य बदलावों के लिए होता है। अगर गलती से या जानबूझकर किसी व्यक्ति के पास दो वोटर आईडी बन गए हैं, तो उन्हें फॉर्म 7 के ज़रिए एक को हटवाना कानूनी रूप से आवश्यक है। इसे नज़रअंदाज़ करना दोषसिद्धि का कारण बन सकता है।


इस पूरे प्रकरण से यह स्पष्ट है कि मतदाता पहचान पत्र को लेकर नियमों का उल्लंघन गंभीर अपराध है। चाहे वह आम नागरिक हो या सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति, सभी को वोटर लिस्ट में पारदर्शिता और वैधता बनाए रखने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए। भारत जैसे लोकतंत्र में एक व्यक्ति, एक वोट, एक पहचान की नीति ही चुनावी प्रक्रिया की नींव है, और इससे समझौता नहीं किया जा सकता। 

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रिपोर्टर / लेखक

PRIYA DWIVEDI

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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