ब्रेकिंग
UCC पर डॉ प्रेम कुमार का बड़ा बयान, बोले- ‘एक देश, एक कानून’ पूरे भारत में लागू होमंत्री अशोक चौधरी बने असिस्टेंट प्रोफेसर, पटना के एएन कॉलेज में ली पहली क्लासनीतीश कुमार पर प्रशांत किशोर ने बोला बड़ा हमला, कहा..अब JDU भी परिवारवाद से अछूता नहीं रहा हाजीपुर में निगरानी की बड़ी कार्रवाई, 50 हजार घूस लेते खनन विभाग के दो कर्मचारी रंगेहाथ गिरफ्तारपटना में रामनवमी पर हाई अलर्ट, महावीर मंदिर समेत प्रमुख स्थलों पर कड़ी सुरक्षा के प्रबंधUCC पर डॉ प्रेम कुमार का बड़ा बयान, बोले- ‘एक देश, एक कानून’ पूरे भारत में लागू होमंत्री अशोक चौधरी बने असिस्टेंट प्रोफेसर, पटना के एएन कॉलेज में ली पहली क्लासनीतीश कुमार पर प्रशांत किशोर ने बोला बड़ा हमला, कहा..अब JDU भी परिवारवाद से अछूता नहीं रहा हाजीपुर में निगरानी की बड़ी कार्रवाई, 50 हजार घूस लेते खनन विभाग के दो कर्मचारी रंगेहाथ गिरफ्तारपटना में रामनवमी पर हाई अलर्ट, महावीर मंदिर समेत प्रमुख स्थलों पर कड़ी सुरक्षा के प्रबंध

Anshul Mishra Contempt Case: कोर्ट ने क्यों सुना दी IAS अंशुल मिश्रा को एक माह की सजा,साथ में जज ने लगाई फटकार

Anshul Mishra Contempt Case: तमिलनाडु में अदालत की अवमानना के एक गंभीर मामले में मद्रास हाईकोर्ट ने वरिष्ठ IAS अधिकारी अंशुल मिश्रा को एक महीने की साधारण कारावास की सजा सुनाई है।

अंशुल मिश्रा सजा, IAS अधिकारी कोर्ट अवमानना, मद्रास हाईकोर्ट फैसला, जमीन अधिग्रहण मामला, तमिलनाडु हाईकोर्ट, Anshul Mishra Contempt Case, Madras High Court Order, Land Dispute Chennai, TNHB Land Case,
IAS अंशुल मिश्रा को एक माह की सजा
© Google
Nitish KumarNitish Kumar|
|AMP
विज्ञापन — Rectangle

Anshul Mishra Contempt Case: मद्रास हाईकोर्ट ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अंशुल मिश्रा को अदालत की अवमानना का दोषी करार देते हुए  हुए एक महीने की साधारण कारावास की सजा सुनाई है।यह सजा चेन्नई मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (CMDA) के पूर्व सदस्य सचिव के रूप में कोर्ट आदेश की अनदेखी करने के चलते दी गई। साथ ही कोर्ट ने उनके वेतन से याचिकाकर्ताओं को ₹25,000 का मुआवज़ा देने का निर्देश भी दिया है। कोर्ट ने हालांकि 30 दिनों की राहत दी है ताकि अधिकारी इस सजा के खिलाफ अपील कर सकें।


1983 से लंबित मामला, जमीन अधिग्रहण से जुड़ा विवाद

यह मामला वर्ष 1983 का है, जब तमिलनाडु हाउसिंग बोर्ड (TNHB) ने चेन्नई में याचिकाकर्ता भाई-बहन आर. ललितांबाई और के.एस. विश्वनाथन की 17 सेंट (करीब 7400 वर्ग फुट) जमीन अधिग्रहित की थी। इस जमीन पर बहुमंजिला इमारतें तो बनाईं गईं, लेकिन उनका वर्षों तक उपयोग नहीं किया गया। पीड़ितों ने जमीन वापसी के लिए CMDA से संपर्क किया, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। नवंबर 2023 में हाईकोर्ट ने CMDA को दो महीने के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया था, जिसकी अनदेखी की गई। परिणामस्वरूप, अगस्त 2024 में याचिकाकर्ताओं ने अदालत में अवमानना याचिका दाखिल की।


न्यायमूर्ति वेलमुरुगन की सख्त टिप्पणी

मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति पी. वेलमुरुगन ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि गरीब और पीड़ित लोगों को न्याय के लिए सरकारी कार्यालयों और अदालतों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। और जब अदालत आदेश देती है, तब भी अधिकारी आदेशों की अनदेखी करते हैं। यह न्यायपालिका और जनता दोनों के साथ अन्याय है। उन्होंने आगे कहा कि अधिकारियों द्वारा अदालत के आदेशों की अनदेखी एक आम प्रवृत्ति बनती जा रही है, जो न्याय प्रणाली में आमजन के विश्वास को कमजोर करती है। वर्तमान में अंशुल मिश्रा तमिलनाडु अर्बन हैबिटेट डेवलपमेंट बोर्ड (TNUHDB) के प्रबंध निदेशक के पद पर फरवरी 2025 से कार्यरत हैं। इससे पूर्व वे CMDA के सदस्य सचिव के पद पर थे, जब यह मामला उनके समक्ष लंबित था। 


इस खबर के बारे में
Nitish Kumar

रिपोर्टर / लेखक

Nitish Kumar

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

विज्ञापन

संबंधित खबरें