Changing Weather and Asthma: अभी बदलते मौसम में अस्थमा के मरीजों को खास सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि यह समय उनके लिए ज्यादा परेशानी वाला हो सकता है। जानें अस्थमा मरीज कैसे रखे अपनी सेहत का ध्यान...
जब मौसम बदलता है, तो अस्थमा के मरीजों को ज्यादा सतर्क रहने की ज़रूरत होती है। अस्थमा एक लंबे समय तक रहने वाली फेफड़ों की बीमारी है जिसमें सांस की नलियाँ सूज जाती हैं और सिकुड़ जाती हैं। इसके कारण मरीज को सांस लेने में तकलीफ, खांसी, सीने में जकड़न और सीटी जैसी आवाज आने लगती है। मौसम बदलने पर ये लक्षण अचानक और तेज़ हो सकते हैं। तेज ठंड या गर्मी, धूल, परागकण (पॉलन) और प्रदूषण जैसे चीज़ें अस्थमा को और भी बढ़ा सकती हैं।
मौसम बदलने पर क्यों बढ़ती है दिक्कत?
जब मौसम अचानक बदलता है – जैसे ठंडी हवा चलने लगे या बारिश हो, तो इससे हवा में नमी बढ़ जाती है, जो अस्थमा के मरीजों के फेफड़ों को और भी संवेदनशील बना देती है। साथ ही, प्रदूषण और पॉलन से फेफड़ों में जलन और सूजन भी बढ़ती है। इससे मरीजों को सांस लेने में परेशानी, लगातार खांसी और सीने में भारीपन महसूस हो सकता है। यह बीमारी किसी को भी हो सकती है, लेकिन बच्चों और बुजुर्गों में इसका असर ज्यादा होता है। इसलिए इसे मामूली न समझें।
अस्थमा मरीजों को क्या करना चाहिए?
दवाइयों और इनहेलर का रोज़ इस्तेमाल करें, जैसा डॉक्टर ने बताया हो।
घर को साफ और धूल-रहित रखें।
ठंड या बारिश में बाहर जाने से बचें, अगर जाना पड़े तो मास्क और गर्म कपड़े पहनें।
हल्की-फुल्की एक्सरसाइज और योग करें ताकि फेफड़ों की ताकत बनी रहे।
सर्दियों में कमरे में नमी बनाए रखें, और गर्मियों में ठंडी और हवादार जगह पर रहें।
अगर अचानक सांस फूलने या खांसी की समस्या हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
जरूरी सावधानियाँ-
धूल, धुआं और प्रदूषण से दूर रहें।
बाहर ठंड में निकलें तो शॉल या स्कार्फ से नाक और मुंह ढक लें।
घर की सफाई और ताजा हवा का ध्यान रखें।
धूम्रपान या धुएँ वाले माहौल से बचें।
अगर लक्षण बढ़ें, तो डॉक्टर से तुरंत सलाह लें।
अपनी दवाइयां और इनहेलर हमेशा पास रखें।




