DESK: साइबर अपराधियों ने ठगी का नया तरीका इजाद कर लिया है। अब वे OTP मांगने के बजाय सिर्फ 1 रुपए का लेन-देन करवाकर लोगों के बैंक खाते की अहम जानकारी हासिल कर लेते हैं और फिर पूरा अकाउंट खाली कर देते हैं। कई लोग इस जाल में फंसकर जीवनभर की कमाई गँवा बैठे हैं। ऐसे शातिर ठगों से सावधान रहने की जरूरत है। देखिये कैसे ये भोले-भाले लोगों को अपना शिकार बनाते हैं।
ऐसे करते हैं ठगी?
साइबर विशेषज्ञ और सीओ रामनगर सुमित पांडे की माने तो ठग खुद को बीमा एजेंट, किराया वसूलीकर्ता, सिम या एटीएम एक्टिवेशन से जुड़ा कर्मचारी, निगम टैक्स कर्मी, बैंक कर्मी बताकर कॉल करता है। वह अगले व्यक्ति को किसी तरह से अपने झांसे में ले लेता है। उन्हें विश्वास दिलाने के लिए कहता हैं कि केवल जांच के लिए एक रुपया भेजिये।
एक गलती और सारा अकाउंट खाली
जैसे ही यूपीआई या नेट बैंकिंग से एक रुपये का छोटा लेन-देन करता है, अपराधी उसके मोबाइल नंबर और खाते की महत्वपूर्ण जानकारी चुरा लेता हैं। जिसके बाद कुछ ही देर में उक्त व्यक्ति के अकाउंट को खाली कर दिया जाता है। पीड़ित को भी पता नहीं चल पाता है कि यह सब फर्जीवाड़ा कैसे हुआ?
ठगी के दो मामले आए सामने
ताजा मामला उत्तराखंड के हल्द्वानी कोतवाली क्षेत्र के टीपी नगर का है, जहां सेना के एक जवान को 10 अगस्त को बीमा पॉलिसी एक्टिवेशन के नाम पर कॉल आया। ठग ने पहले जवान से 1 रुपया भेजने को कहा। रुपया भेजते ही उसके खाते से 57 हजार रुपये गायब हो गए। वही दूसरा मामला बनबसा निवासी एक व्यापारी से जुड़ा है। इन्हें भी शातिर ठगों ने अपना शिकार बनाया है। ऑनलाइन ऑर्डर के नाम पर इनके साथ ठगी की गई। साइबर ठग ने भुगतान न होने का बहाना बनाकर व्यापारी से 1 रुपया डालने को कहा। व्यापारी ने जैसे ही पैसा भेजा, उसके अकाउंट से 29 हजार रुपये उड़ा लिए गए।
ठगी से बचने के उपाय
किसी भी अनजान व्यक्ति को पैसा या दस्तावेज़ न भेजें।
संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें, ये खतरनाक ऐप या वेबसाइट तक ले जा सकते हैं।
बैंक, बीमा कंपनी या सेवा प्रदाता से जुड़े अनुरोध की हमेशा आधिकारिक पुष्टि करें।
यूपीआई या नेट बैंकिंग में मजबूत पासवर्ड और टू-स्टेप वेरिफिकेशन का उपयोग करें।
मोबाइल पर मौजूद सभी ऐप्स को समय-समय पर अपडेट करते रहें।
यूपीआई या नेट बैंकिंग में मजबूत पासवर्ड का इस्तेमाल करें।





