पटना जंक्शन पर महाकुंभ में जाने वाले यात्रियों की बेलगाम भीड़ से हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। प्रयागराज जाने के लिए हर दिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु स्टेशन पर उमड़ रहे हैं, जिससे प्लेटफॉर्म और ट्रेनें जरूरत से कई गुना ज्यादा भर जाती हैं। हालात ऐसे हैं कि 70-75 सीटों वाली जनरल बोगी में 1000 से ज्यादा यात्री ठूंस-ठूंस कर भरे नजर आ रहे हैं। भीड़ को नियंत्रित करने में रेल प्रशासन, आरपीएफ और जीआरपी पूरी तरह विफल साबित हो रही है। रात होते-होते हालात और खराब होते जा रहे हैं, अनियंत्रित भीड़ से यात्री परेशान हैं।
रात नौ बजे के बाद यात्रियों की संख्या दोगुनी हो जा रही है। बड़ी संख्या में बिना टिकट यात्री जबरन ट्रेनों में चढ़ रहे हैं, जिससे आरक्षित यात्रियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। प्रयागराज जाने वाली ट्रेनों में इतनी भीड़ हो रही है कि कई यात्रियों को ट्रेन पकड़ने के बाद भी उसमें चढ़ने का मौका नहीं मिल रहा है। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए रेल पुलिस ने कई बार बल प्रयोग किया, लेकिन इसका कोई खास असर नहीं दिखा। इसके चलते कई आरक्षित यात्रियों की ट्रेनें छूट गईं, जिससे वे गुस्से और मायूसी में स्टेशन पर बैठने को मजबूर हो गए।
यात्रियों और रेलकर्मियों को डर है कि अगर जल्द ही हालात पर काबू नहीं पाया गया तो दिल्ली जैसा बड़ा हादसा हो सकता है। शनिवार रात नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर बेकाबू भीड़ के कारण भगदड़ मच गई। रात करीब 10 बजे हुई भगदड़ में 14 महिलाओं समेत 18 लोगों की मौत हो गई। पटना जंक्शन पर भी यात्रियों की संख्या बढ़ रही है, जिससे इस तरह के हादसे की आशंका बढ़ गई है।
शनिवार को भागलपुर से आनंद विहार टर्मिनल जा रही विक्रमशिला एक्सप्रेस में यात्रियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। हालात इतने खराब थे कि आरपीएफ जवानों के लिए भीड़ को संभालना मुश्किल हो गया। सिर्फ जनरल बोगियां ही नहीं, बल्कि एसी और स्लीपर कोच भी पूरी तरह से खचाखच भरे हुए थे। आरक्षित टिकट वाले कई यात्री ट्रेन में सवार नहीं हो सके, जिससे 100 से ज्यादा यात्रियों की ट्रेन छूट गई। स्टेशन पर मौजूद कई यात्री इसलिए रो पड़े, क्योंकि समय पर प्रयागराज पहुंचने की उनकी उम्मीदें टूट गईं।





