Patna transport : पटना के फुलवारी स्थित परिवहन परिसर में करोड़ों रुपये की लागत से बनाए गए सरकारी आवास पिछले तीन वर्षों से बेकार पड़े हुए हैं। वर्ष 2023 में अधिकारियों और कर्मचारियों को रहने की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाए गए इन आवासों का अब तक किसी को आवंटन नहीं किया जा सका है। सबसे बड़ी वजह यहां बिजली कनेक्शन का अभाव बताया जा रहा है। बिजली सुविधा नहीं होने के कारण 40 से अधिक फ्लैट धूल फांक रहे हैं और धीरे-धीरे जर्जर होते जा रहे हैं।
परिवहन विभाग की ओर से बनाए गए इस परिसर में तीन मंजिला कई भवन बनाए गए हैं। इसमें दो और तीन कमरों वाले करीब 40 फ्लैट तैयार किए गए थे। इन आवासों का निर्माण अधिकारियों और कर्मचारियों को बेहतर सुविधा देने के लिए किया गया था, ताकि वे कार्यालय परिसर के पास ही रह सकें और कार्य में सुगमता बनी रहे। लेकिन निर्माण पूरा होने के बावजूद आज तक इन फ्लैटों में कोई रहने नहीं आया है।
जानकारी के अनुसार, शुरुआत में इन आवासों को बिहार राज्य पथ परिवहन निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों को आवंटित करने का निर्णय लिया गया था। हालांकि बाद में यह सामने आया कि निगम में केवल दो अधिकारी—प्रशासक और उप प्रशासक—ही स्थायी पद पर कार्यरत हैं, जबकि बाकी कर्मचारी संविदा पर नियुक्त हैं।
सरकारी नियमों के अनुसार संविदा कर्मियों को सरकारी आवास उपलब्ध कराने का प्रावधान नहीं है। इसके बाद इन फ्लैटों को जिला परिवहन कार्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों को आवंटित करने की योजना बनाई गई, लेकिन बिजली कनेक्शन की समस्या आड़े आ गई।
परिवहन परिसर में फिलहाल केवल एक ट्रांसफार्मर लगा हुआ है, जो कार्यालय की बिजली जरूरतों को पूरा करता है। बिजली विभाग ने आवासों के लिए अलग से ट्रांसफार्मर लगाने की सलाह दी है। इसके लिए कई लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस खर्च और तकनीकी प्रक्रिया के कारण आवास आवंटन की प्रक्रिया लंबे समय से लंबित है।
इन आवासों की अनदेखी के कारण परिसर में झाड़ियां उग आई हैं और रख-रखाव के अभाव में भवनों की स्थिति खराब होने लगी है। कई जगहों पर खिड़कियों के शीशे टूटने लगे हैं और भवनों की संरचना भी धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगी है। अगर जल्द ही इन आवासों का उपयोग नहीं किया गया तो करोड़ों रुपये की लागत से बनी यह संपत्ति पूरी तरह बेकार हो सकती है।
दूसरी ओर, जिला परिवहन कार्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों के आवास पर राज्य सरकार को हर महीने करीब साढ़े तीन लाख रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। यदि फुलवारी स्थित आवासों का आवंटन कर दिया जाए तो सरकार के इस खर्च में काफी कमी आ सकती है।
पटना के डीटीओ उपेंद्र कुमार पाल ने बताया कि जल्द ही जिला परिवहन कार्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों को इन आवासों का आवंटन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बिजली कनेक्शन की समस्या को दूर करने की प्रक्रिया भी चल रही है और उम्मीद है कि जल्द ही यह समस्या समाप्त हो जाएगी। विभाग की ओर से आवासों के रख-रखाव और उपयोग को लेकर आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि सरकारी संपत्ति का सही उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।





