Bihar News : भारत में लाखों लोग ऐसे हैं जिनके छोटे-छोटे विवाद, ट्रैफिक चालान या चेक बाउंस जैसे मामले सालों तक अदालतों में लंबित रहते हैं। इन मामलों के कारण लोगों को बार-बार कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती है। ऐसे मामलों को जल्दी और आपसी सहमति से सुलझाने के लिए समय-समय पर लोक अदालत का आयोजन किया जाता है।
इसी कड़ी में बिहार की राजधानी पटना में 14 मार्च को नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। इसका आयोजन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) की ओर से किया जा रहा है। इस लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य लंबित मामलों का तेजी से निपटारा करना और लोगों को लंबी अदालत प्रक्रिया से राहत दिलाना है।
सुबह 10:30 बजे से शुरू होगी लोक अदालत
प्रशासन की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, 14 मार्च को आयोजित होने वाली नेशनल लोक अदालत सुबह 10:30 बजे से शुरू होगी। इस लोक अदालत का आयोजन पटना सदर सिविल कोर्ट के साथ-साथ जिले के अन्य उपमंडलीय न्यायालयों में भी किया जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसका लाभ उठा सकें।
अधिकारियों का कहना है कि लोक अदालत के माध्यम से ऐसे मामलों का निपटारा जल्दी हो जाता है जिनमें दोनों पक्ष आपसी समझौते के लिए तैयार होते हैं। इससे कोर्ट में लंबित मामलों की संख्या भी कम होती है और लोगों को तत्काल राहत मिलती है।
इन न्यायालयों में लगेगी लोक अदालत
पटना जिले के कई न्यायालयों में एक साथ लोक अदालत आयोजित की जाएगी। इनमें प्रमुख रूप से पटना सदर सिविल कोर्ट, पटना सिटी, दानापुर, बाढ़, मसौढ़ी और पालीगंज के उपमंडलीय न्यायालय शामिल हैं।इन सभी स्थानों पर ऐसे मामलों की सुनवाई होगी जिन्हें बातचीत और आपसी सहमति से आसानी से सुलझाया जा सकता है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि जिनके मामले इन श्रेणियों में आते हैं, वे लोक अदालत में आवेदन कर अपने मामले का जल्द समाधान करा सकते हैं।
इन मामलों की होगी सुनवाई
लोक अदालत में आमतौर पर ऐसे मामलों को शामिल किया जाता है जिनका समाधान समझौते के आधार पर हो सकता है। इस बार भी कई तरह के मामलों को लोक अदालत में रखा जाएगा। इनमें मुख्य रूप से छोटे आपराधिक मामले, चेक बाउंस से जुड़े मामले (नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138), बिजली बिल या बिजली से जुड़े विवाद, मोटर वाहन दुर्घटना मुआवजा से जुड़े मामले, दीवानी विवाद, वजन और माप से जुड़े मामले, श्रम विवाद, बैंक लोन रिकवरी मामले और ट्रैफिक चालान से जुड़े केस शामिल हैं। इन सभी मामलों को दोनों पक्षों की सहमति से जल्द निपटाने की कोशिश की जाएगी, ताकि लोगों को लंबी कानूनी प्रक्रिया से छुटकारा मिल सके।
ऐसे कराएं रजिस्ट्रेशन
अगर किसी व्यक्ति का मामला ऊपर बताई गई श्रेणियों में आता है, तो वह अपने संबंधित न्यायालय या जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यालय में जाकर आवेदन दे सकता है। इसके अलावा संबंधित कोर्ट में लंबित मामले वाले पक्ष भी अपने केस को लोक अदालत में भेजने का अनुरोध कर सकते हैं। रजिस्ट्रेशन के लिए संबंधित केस से जुड़े दस्तावेज, पहचान पत्र और आवश्यक कागजात जमा करने होते हैं। आवेदन स्वीकार होने के बाद दोनों पक्षों को लोक अदालत की तारीख और समय की जानकारी दी जाती है।
तुरंत लागू होता है लोक अदालत का फैसला
लोक अदालत की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें दिया गया फैसला अंतिम और बाध्यकारी होता है। इस फैसले के खिलाफ आमतौर पर किसी अन्य अदालत में अपील नहीं की जा सकती। इसके अलावा लोक अदालत में मामलों का निपटारा होने पर कोर्ट फीस भी वापस कर दी जाती है।
ऐसे में जिन लोगों के छोटे-मोटे विवाद या ट्रैफिक चालान जैसे मामले लंबित हैं, उनके लिए 14 मार्च को होने वाली नेशनल लोक अदालत एक अच्छा अवसर साबित हो सकती है। यहां आपसी समझौते के आधार पर कम समय में मामला सुलझाकर लोग कोर्ट के लंबे चक्कर से बच सकते हैं।






