Bihar teacher transfer : बिहार में शिक्षक ट्रांसफ़र और पोस्टिंग को लेकर एक बार फिर विधान परिषद में गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आज विधानसभा में भाजपा के ही विधान पार्षद जीवन कुमार ने शिक्षा मंत्री सुनील कुमार से शिक्षक आवंटन प्रक्रिया पर सवाल किया। जीवन कुमार ने कहा कि शिक्षा विभाग ने निर्देश जारी किया था कि शिक्षकों को उनके गृह जिले में ही ट्रांसफ़र और पोस्टिंग दी जाएगी, यदि वे स्वयं इसकी मर्जी रखते हैं। इसके तहत कई शिक्षकों को उनके इच्छित स्थान पर स्थानांतरित किया जाना था।
हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि आज भी कई शिक्षकों को उनके गृह जिले से दूर, लगभग 150 किलोमीटर दूर, पदस्थापित किया गया है। इस स्थिति ने न केवल शिक्षकों के कामकाज को प्रभावित किया है, बल्कि उनके व्यक्तिगत जीवन और स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर डाला है। जीवन कुमार ने विशेष रूप से असाध्य रोग या गंभीर बीमारियों से पीड़ित शिक्षकों की स्थिति का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि इन शिक्षकों के लिए गृह जिला आधारित ट्रांसफ़र बहुत आवश्यक है, ताकि उनकी बीमारी और इलाज की परेशानियों में कमी आए।
सिर्फ स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि परिवारिक परिस्थितियों को लेकर भी कई समस्याएं सामने आई हैं। जीवन कुमार ने कहा कि पति-पत्नी के पदस्थापन को भी नियम के अनुसार प्राथमिकता मिलनी चाहिए, लेकिन कई मामलों में इसका पालन नहीं किया गया। इससे न केवल परिवारिक संतुलन प्रभावित हुआ है, बल्कि शिक्षकों की नौकरी और कार्यक्षमता पर भी असर पड़ा है।
इस पर शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि जिन शिक्षकों को गंभीर बीमारी है, उनका ट्रांसफ़र पहले ही किया गया है। वहीं जिन शिक्षकों का ट्रांसफ़र अभी तक उनके गृह जिले में नहीं हुआ, उनके लिए दूसरा अवसर दिया जाएगा। मंत्री ने यह भी कहा कि यदि कोई शिक्षक अभी भी समस्या का सामना कर रहा है, तो सरकार विभाग से सम्पर्क करके उचित कार्रवाई सुनिश्चित करेगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि विभाग इस मामले में शीघ्र कार्रवाई करेगा और नियमों के अनुसार सभी शिक्षकों को उनके अधिकार और सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
बहरहाल, शिक्षा मंत्री द्वारा दिए गए आश्वासन के बाद यह उम्मीद जताई जा रही है कि शेष मामलों में शीघ्र सुधार किया जाएगा और गृह जिला आधारित ट्रांसफ़र नीति का पालन प्रभावी रूप से सुनिश्चित किया जाएगा।





