Bihar News: बिहार में बालू घाटों की नीलामी प्रक्रिया में जारी सुस्ती को लेकर खान एवं भू-तत्व विभाग सख्त हो गया है। कई जिलों में बड़ी संख्या में घाटों की नीलामी लंबित रहने से न केवल राजस्व संग्रह प्रभावित हो रहा है, बल्कि बालू आपूर्ति पर भी असर पड़ने की आशंका है।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि राज्य में अब तक बालू घाटों की नीलामी प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। इस धीमी प्रगति पर नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए गए हैं कि वे लंबित घाटों की नीलामी और आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियां तत्काल सुनिश्चित करें।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, राज्य के कुल 463 पीला बालू घाटों में से अब तक 306 घाटों की नीलामी की जा चुकी है, जबकि 180 घाटों के लिए कार्यादेश भी जारी किए गए हैं। इसके बावजूद कई जिलों में प्रक्रिया अपेक्षित गति नहीं पकड़ पाई है।
जिलावार स्थिति पर नजर डालें तो औरंगाबाद में सबसे अधिक 57 बालू घाटों की नीलामी लंबित है। इसके अलावा गया में 20, जहानाबाद में 12, पटना और नवादा में 11-11, भोजपुर में 10, रोहतास और नालंदा में 8-8, जमुई में 7, लखीसराय और भागलपुर में 5-5 तथा अरवल में 3 घाटों की नीलामी अब तक नहीं हो पाई है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, पहले भी कई बार निर्देश दिए गए थे, लेकिन अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर अब संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के संकेत दिए गए हैं। अधिकारियों को जिला समाहर्ता के साथ समन्वय स्थापित कर शीघ्र निविदा आमंत्रित करने और पारदर्शी तरीके से नीलामी प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया है। विभाग का मानना है कि समय पर नीलामी और स्वीकृतियों की प्रक्रिया पूरी होने से न केवल राजस्व में वृद्धि होगी, बल्कि निर्माण कार्यों के लिए बालू की निर्बाध आपूर्ति भी सुनिश्चित की जा सकेगी।



