Bihar Police : बिहार पुलिस के हजारों कर्मियों के लिए राहत भरी खबर है। अब प्रोमोशन और एसीपी-एमसीपी जैसे वित्तीय लाभ फाइलों में नहीं अटकेंगे। पुलिस मुख्यालय ने गैर-राजपत्रित पुलिसकर्मियों की सेवा पुस्तिका (सर्विस बुक) को पूरी तरह ऑनलाइन करने का फैसला लिया है। यह व्यवस्था अभी तक भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों के लिए लागू थी, लेकिन अब इसे राज्य के निचले स्तर के अधिकारियों और कर्मियों तक भी विस्तारित किया जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, इस प्रस्ताव को अंतिम रूप दे दिया गया है और जल्द ही इसे कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। सरकार की स्वीकृति मिलते ही इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। नई व्यवस्था के तहत पहले चरण में जमादार, दारोगा और इंस्पेक्टर स्तर के करीब 30 हजार पुलिस पदाधिकारियों का सर्विस रिकॉर्ड ऑनलाइन किया जाएगा। इसके बाद दूसरे चरण में सिपाही और हेड कांस्टेबल स्तर के लगभग एक लाख कर्मियों को भी इस डिजिटल सिस्टम से जोड़ा जाएगा।
इस पहल का सबसे बड़ा असर एसीपी (Assured Career Progression) और एमसीपी (Modified Career Progression) लाभों पर पड़ेगा। अब तक ये लाभ अक्सर कागजी प्रक्रिया, लापरवाही या रिकॉर्ड की कमी के कारण अटक जाते थे। कई मामलों में योग्य कर्मी केवल इस वजह से वंचित रह जाते थे क्योंकि उनकी सेवा पुस्तिका या गोपनीय रिपोर्ट समय पर उपलब्ध नहीं हो पाती थी।
मौजूदा मैनुअल व्यवस्था में कई बार ऐसी विसंगतियां भी सामने आई हैं, जहां विभागीय जांच लंबित रहने के बावजूद कुछ कर्मियों को प्रोमोशन या वित्तीय लाभ मिल गया, जबकि कई योग्य अधिकारी सिर्फ दस्तावेजों की कमी के कारण पीछे रह गए। इसका सबसे ज्यादा असर एएसआई और दरोगा स्तर के कर्मियों पर पड़ा है।
फरवरी में हुई एक बैठक इसका उदाहरण है, जिसमें 856 पुलिस अवर निरीक्षकों को लाभ दिया गया, लेकिन करीब 200 कर्मी केवल गोपनीय रिपोर्ट के अभाव में वंचित रह गए। वहीं, 9 मार्च को हुई स्क्रीनिंग में 83 को पात्र और 163 को अपात्र घोषित किया गया। इनमें से अधिकांश मामलों में सेवा पुस्तिका ही प्रस्तुत नहीं की गई थी।
ऑनलाइन सर्विस बुक लागू होने के बाद हर पुलिसकर्मी का पूरा सेवा रिकॉर्ड डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेगा। इससे यह तुरंत पता चल सकेगा कि किसी कर्मी के खिलाफ कोई विभागीय जांच लंबित है या नहीं। साथ ही, रिकॉर्ड स्वतः अपडेट होते रहने से प्रोमोशन और वित्तीय लाभ देने की प्रक्रिया पारदर्शी और तेज हो जाएगी।
पुलिस मुख्यालय के इस कदम को प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इससे न केवल कार्य प्रणाली में पारदर्शिता आएगी, बल्कि कर्मियों का मनोबल भी बढ़ेगा। वर्षों से लंबित समस्याओं का समाधान होने की उम्मीद है। अगर सब कुछ तय समय पर हुआ, तो आने वाले महीनों में बिहार पुलिस के हजारों कर्मियों को इसका सीधा फायदा मिल सकता है।





