Bihar News: बिहार सरकार ने राज्य में बढ़ते अवैध खनन और ओवरलोडिंग मामलों को लेकर कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। राज्य के उपमुख्यमंत्री सह खान एवं भूतत्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट किया कि जिन थाना क्षेत्रों में अवैध खनन या ओवरलोडिंग की शिकायतें सामने आ रही हैं, वहां के थानाध्यक्षों और संबंधित पुलिस अधीक्षकों (एसपी) की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी। यदि संलिप्तता पाई गई, तो उन्हें जवाबदेह ठहराया जाएगा।
डिप्टी सीएम ने मंगलवार को सचिव दिवेश सेहरा, निदेशक विनोद दूहन और राज्यभर से आए खनन पदाधिकारियों की मौजूदगी में खनन विभाग की समीक्षा बैठक की। इस दौरान उन्होंने यह बयान दिया। बता दें कि, बैठक का मुख्य उद्देश्य खनन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता लाना, विभागीय जवाबदेही तय करना और अवैध गतिविधियों पर लगाम कसना था।
वहीं, बैठक में डिप्टी सीएम सिन्हा ने स्टोन चिप्स कारोबारियों के प्रतिनिधियों के साथ भी चर्चा की। व्यवसायियों ने रेलवे रैक से बिहार में लाए जा रहे पत्थर पर निर्गत एनआईसी चालान को लेकर हो रही तकनीकी और प्रक्रियागत परेशानियों को सामने रखा। इस पर उपमुख्यमंत्री ने तीन सदस्यीय समिति गठित करने का निर्देश दिया है, जो चालान प्रक्रिया की समीक्षा कर यह तय करेगी कि इसे जारी रखा जाए या कोई नया सिस्टम अपनाया जाए। रिपोर्ट आने तक वर्तमान चालान व्यवस्था लागू रहेगी।
राज्य सरकार ने अब तक कुल 463 खनन घाटों को नीलामी के लिए अधिसूचित किया है, जिनमें से 316 घाटों की सफल नीलामी हो चुकी है। शेष 147 घाटों की नीलामी प्रक्रिया विभिन्न कारणों से अटकी हुई है। मंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि इन शेष घाटों की पुनः नीलामी प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाए।
बैठक के दौरान मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने यह भी कहा कि जिन जिलों में राजस्व वसूली की स्थिति कमजोर है, वहां के जिला खनन पदाधिकारियों से लिखित स्पष्टीकरण लिया जाए। उन्होंने साफ किया कि सरकार की प्राथमिकता है कि खनन कार्य कानूनी ढांचे के अंतर्गत पारदर्शी रूप से संचालित हो और राज्य को अधिकतम राजस्व प्राप्त हो।





