Bihar news : बिहार के मुजफ्फरपुर शहर में करीब 200 संदिग्ध लोगों के डेरा डालने की सूचना से प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। शहर के बीएमपी-6 के समीप कन्हौली मोहल्ला में एक खाली प्लॉट और धिरनपट्टी में श्यामनंदन सहाय कॉलेज के पास सड़क किनारे लगभग 40 तंबुओं में इन लोगों के रहने की जानकारी सामने आई है। इन लोगों के विदेशी होने की आशंका जताई जा रही है, जिसके बाद पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने जांच तेज कर दी है।
विशेष शाखा की गोपनीय रिपोर्ट के आधार पर सीआईडी ने मामले की जांच शुरू की। सीआईडी के कमजोर वर्ग के डीएसपी अनंत कुमार के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित की गई, जिसने मौके पर पहुंचकर पूरे मामले की पड़ताल की। जांच के बाद सीआईडी डीएसपी ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट मुजफ्फरपुर के एसएसपी कार्यालय को सौंप दी है।
पुलिस की छानबीन और पूछताछ के दौरान तंबुओं में रह रहे लोगों ने खुद को असम के बारपेटा जिले का निवासी बताया है। इन लोगों में बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। हालांकि, जब पुलिस ने उनसे पहचान से जुड़े दस्तावेज मांगे तो वे कोई भी वैध पहचान पत्र या शिनाख्ती कागजात पेश नहीं कर पाए। इसी कारण इनकी पहचान और नागरिकता को लेकर संदेह बना हुआ है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, ये परिवार तंबुओं में रहकर कचरा चुनने का काम करते हैं और उसी से अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। बताया जा रहा है कि बीएमपी-6 के पास स्थित जिस खाली प्लॉट में ये लोग रह रहे हैं, उसका मालिक प्रत्येक तंबू के लिए उनसे किराया भी वसूल रहा है। पुलिस अब जमीन मालिक से भी पूछताछ की तैयारी कर रही है।
विशेष शाखा की रिपोर्ट में आशंका जताई गई थी कि मिठनपुरा और बेला इलाके में रह रहे इन परिवारों में कुछ लोग बांग्लादेशी या रोहिंग्या हो सकते हैं। इसी सूचना के आधार पर पुलिस मुख्यालय ने मुजफ्फरपुर पुलिस को पूरे मामले की विस्तृत जांच करने का निर्देश दिया था। इसके बाद एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा ने एसआईटी का गठन किया, जिसमें सीआईडी डीएसपी के अलावा तीन इंस्पेक्टर और एक सब-इंस्पेक्टर को शामिल किया गया है।
एसआईटी ने मौके पर जाकर तंबुओं में रह रहे लोगों की गिनती, उनकी गतिविधियों और पहचान से जुड़े तथ्यों की जानकारी जुटाई है। फिलहाल टीम की प्रारंभिक रिपोर्ट मुख्यालय को भेजी जा चुकी है। आगे की कार्रवाई पुलिस मुख्यालय के निर्देश के आधार पर की जाएगी।
इससे पहले भी पुलिस ने मुजफ्फरपुर में छापेमारी के दौरान कुछ अफगानी नागरिकों को पकड़ा था, जिनके पास से भारतीय दस्तावेज जैसे आवासीय प्रमाणपत्र, ड्राइविंग लाइसेंस और पैन कार्ड तक बरामद किए गए थे। इससे यह भी सामने आया था कि अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने के बाद कुछ लोग फर्जी तरीके से भारतीय नागरिकता से जुड़े दस्तावेज बनवा लेते हैं।
इसी क्रम में तुर्की थाना क्षेत्र के मधौल गांव के पास पुलिस ने नशे की हालत में कांवरियों से बदसलूकी करते हुए अफगानी नागरिक स्माइल रहीमी समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान पता चला कि स्माइल रहीमी के पास भारत में रहने के वैध दस्तावेज नहीं थे। उसके साथ होमगार्ड एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष अरुण ठाकुर के पुत्र हर्षित आनंद को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया था कि अवैध रूप से भारत में रह रहे अफगानी नागरिक को होमगार्ड एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष अरुण ठाकुर ने पनाह दे रखी थी। इस मामले में तुर्की थाने में उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई थी। हालांकि अब तक इस मामले में अरुण ठाकुर के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है।फिलहाल मुजफ्फरपुर में तंबुओं में रह रहे संदिग्ध लोगों के मामले को लेकर पुलिस और खुफिया एजेंसियां सतर्क हैं। उनकी पहचान और नागरिकता की पुष्टि होने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।




