BIHAR NEWS: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में बिजली विभाग से जुड़ा एक मामला इन दिनों खूब चर्चा में बना हुआ है। जिले के पारू मोहजम्मा गांव में पांच अगस्त 2024 को विभाग की टीम ने बिजली चोरी की शिकायत पर छापेमारी की थी। कार्रवाई के दौरान स्मार्ट मीटर को बायपास कर बिजली उपयोग करने का आरोप लगाया गया और मीटर को जब्त कर लिया गया। हालांकि, उस दिन FIR दर्ज नहीं कराई गई। अब 16 फरवरी 2026 को उसी मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई है। इस देरी ने विभागीय प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
छापेमारी सरैया के विद्युत सहायक अभियंता ओजैर आलम के नेतृत्व में की गई थी। नियमों के अनुसार, जिस दिन बिजली चोरी की पुष्टि होती है, उसी दिन संबंधित थाने में FIR दर्ज करानी होती है। इसके साथ ही ई-साक्ष्य एप पर छापेमारी का वीडियो अपलोड करना भी जरूरी होता है ताकि अदालत में प्रमाण के रूप में पेश किया जा सके। लेकिन इस मामले में यह प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं की गई।
मामला केवल एक गांव तक सीमित नहीं है। खबर के अनुसार, पिछले वर्ष जून महीने में पारू के मधुरपट्टी इलाके में भी अनिल सिंह और शंकर राम के घरों में छापेमारी की गई थी। वहां भी उसी दिन प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। इन मामलों में सात महीने बाद जनवरी 2026 में FIR दर्ज की गई। इतनी लंबी देरी के कारण अदालत में साक्ष्य प्रस्तुत करने में अभियोजन पक्ष को कठिनाई हो रही है।
कानूनी जानकारों का कहना है कि छापेमारी के दिन FIR न होने से केस कमजोर पड़ सकता है। अदालत में बचाव पक्ष इस देरी को आधार बनाकर कार्रवाई की मंशा और प्रक्रिया पर सवाल उठा सकता है। इससे आरोपी को राहत मिलने की संभावना बढ़ जाती है। यही वजह है कि विभाग की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं।
पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने पूरे मामले की समीक्षा शुरू कर दी है। वे यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि FIR दर्ज करने में देरी क्यों हुई और जिम्मेदारी किसकी है। विभागीय स्तर पर भी आंतरिक जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में ऐसी लापरवाही न हो, इसके लिए प्रक्रिया को और सख्त बनाया जाएगा।
स्थानीय लोगों में भी इस मामले को लेकर चर्चा है। कई उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि कार्रवाई के दिन ही प्राथमिकी दर्ज होती तो दोषियों पर तुरंत कानूनी दबाव बनता और बिजली चोरी पर अंकुश लगता।
विभाग का दावा है कि अब बिजली चोरी के मामलों में तेजी लाई गई है। इस वर्ष जनवरी से अब तक जिले के अलग-अलग थानों में 250 से अधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं। फिर भी यह सवाल बना हुआ है कि अगस्त 2024 की कार्रवाई में इतनी देरी क्यों हुई।






