BIHAR NEWS : बिहार में एक बार फिर शिक्षा विभाग चर्चा में है। इस बार मामला मुंगेर जिले के एक विद्यालय से जुड़ा है, जहां उपस्थिति को लेकर उत्पन्न विवाद के बाद एक शिक्षिका ने जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) को लिखित स्पष्टीकरण दिया है। शिक्षिका का यह पत्र अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और इसे लेकर शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
दरअसल, यह पूरा मामला विद्यालय में उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। जिला शिक्षा पदाधिकारी की ओर से शिक्षिका से उनकी उपस्थिति को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया था। इसके जवाब में शिक्षिका ने विस्तृत पत्र लिखकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। पत्र में उन्होंने बताया है कि फरवरी माह में 2 फरवरी से 12 फरवरी 2026 तक इंटरमीडिएट परीक्षा के दौरान उन्हें राजकीय +2 उच्च विद्यालय खड़गपुर में परीक्षा कार्य के लिए प्रतिनियुक्त किया गया था। इस दौरान वे अपने मूल विद्यालय के बजाय परीक्षा केंद्र पर ड्यूटी निभा रही थीं।
शिक्षिका ने अपने स्पष्टीकरण में लिखा है कि परीक्षा ड्यूटी के कारण इस अवधि में उनकी उपस्थिति “मार्क ऑन ड्यूटी” के तहत विद्यालय के बाहर दर्ज की गई थी। यानी वे नियमित रूप से अपने स्कूल में मौजूद नहीं थीं, बल्कि परीक्षा केंद्र पर निर्धारित जिम्मेदारी निभा रही थीं। उन्होंने कहा कि परीक्षा कार्य के दौरान सभी निर्देशों का पालन किया गया और नियमानुसार ड्यूटी पूरी की गई।
उन्होंने यह भी बताया कि 7, 12 और 13 फरवरी 2026 को उन्होंने स्कूल-इन-टाइम और स्कूल-आउट-टाइम की प्रक्रिया पूरी करने की कोशिश की थी। हालांकि, तकनीकी समस्या के कारण यह उपस्थिति ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर दर्ज नहीं हो सकी। शिक्षिका के अनुसार, पोर्टल में तकनीकी गड़बड़ी होने की वजह से उनके प्रयास के बावजूद उपस्थिति सिस्टम में नहीं दिखी। इसके बावजूद 7 और 12 फरवरी की उपस्थिति उन्होंने संबंधित विद्यालय में मैनुअल रूप से भी दर्ज कराई थी, ताकि रिकॉर्ड में कोई कमी न रह जाए।
स्पष्टीकरण पत्र में शिक्षिका ने एक और घटना का जिक्र किया है, जिसने इस मामले को और चर्चा में ला दिया है। उन्होंने बताया कि एक दिन अत्यधिक गर्मी के कारण उन्होंने कम कपड़ा पहन रखा था और अपना दुपट्टा बैग में रख लिया था। जब वे उपस्थिति दर्ज कराने गईं तो दुपट्टा दिखाई नहीं देने के कारण उन्हें डांट-फटकार भी सुननी पड़ी। शिक्षिका ने लिखा कि उस समय स्थिति को समझाने की कोशिश की गई, लेकिन फिर भी उन्हें फटकार का सामना करना पड़ा।
उन्होंने अपने पत्र में यह भी स्पष्ट किया है कि मार्च माह में उनकी उपस्थिति को लेकर भी स्थिति स्पष्ट है। शिक्षिका के अनुसार, 2 और 7 मार्च को वे आकस्मिक एवं विशेष अवकाश पर थीं। वहीं 9 और 10 मार्च का स्कूल-आउट-टाइम ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर पहले से दर्ज है, जो रिकॉर्ड में देखा जा सकता है।
पत्र के अंत में शिक्षिका ने जिला शिक्षा पदाधिकारी से विनम्र अनुरोध किया है कि उनके द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण को स्वीकार किया जाए। उन्होंने कहा कि जो भी स्थिति बनी वह तकनीकी कारणों और ड्यूटी से संबंधित थी, न कि किसी प्रकार की लापरवाही। साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि भविष्य में ऐसी किसी भी प्रकार की स्थिति से बचने के लिए वे पूरी सावधानी बरतेंगी और सभी प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित करेंगी।
फिलहाल यह स्पष्टीकरण पत्र सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। शिक्षा विभाग से जुड़े लोग और आम नागरिक भी इस मामले पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जिला शिक्षा पदाधिकारी इस स्पष्टीकरण पर क्या निर्णय लेते हैं और शिक्षिका को इस मामले में राहत मिलती है या नहीं।






