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BIHAR NEWS : रक्षक ही बन गए भक्षक! बिहार के इस थाने में बच्चों से उतरवाई गई शराब की पेटियाँ, अब उठ रहे बड़े सवाल

कटिहार के रौशना थाना से सामने आई तस्वीरों में नाबालिग बच्चों से जब्त शराब की पेटियाँ उतरवाने का आरोप लगा है। मामला सामने आने के बाद पुलिस पर सवाल उठ रहे हैं।

BIHAR NEWS : रक्षक ही बन गए भक्षक! बिहार के इस थाने में बच्चों से उतरवाई गई शराब की पेटियाँ, अब उठ रहे बड़े सवाल
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BIHAR NEWS : बिहार में कानून व्यवस्था और नशा मुक्ति अभियान को लेकर सरकार लगातार दावे करती रही है, लेकिन कटिहार जिले के रौशना थाना से सामने आई एक तस्वीर ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां पुलिस पर आरोप है कि जब्त की गई अवैध शराब की पेटियाँ उतरवाने के लिए नाबालिग बच्चों से मजदूरी करवाई गई। इस घटना की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिसके बाद पूरे मामले को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।


मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस ने हाल ही में अवैध शराब की एक खेप जब्त की थी। जब्त की गई शराब को ट्रक से उतारकर थाना परिसर में रखा जाना था। आरोप है कि इस काम के लिए मजदूरों को बुलाने के बजाय आसपास के नाबालिग बच्चों को बुलाकर उनसे ही शराब की पेटियाँ उतरवाई गईं। वायरल तस्वीरों में छोटे-छोटे बच्चे शराब की पेटियाँ उठाकर ट्रक से उतारते दिखाई दे रहे हैं।


स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पूरा घटनाक्रम थाना परिसर में ही हुआ। बताया जा रहा है कि उस समय कुछ प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर मौजूद थे, लेकिन इसके बावजूद बच्चों से यह काम करवाने पर किसी ने रोक नहीं लगाई। यही वजह है कि अब इस मामले को लेकर प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।


दरअसल, भारत में बाल श्रम कानून के तहत नाबालिग बच्चों से मजदूरी करवाना अपराध माना जाता है। खासकर ऐसे काम जिनमें जोखिम हो या नशे से जुड़ी वस्तुएं शामिल हों, उनमें बच्चों को शामिल करना कानूनन पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद अगर किसी पुलिस थाने में ही बच्चों से शराब की पेटियाँ उतरवाई जाती हैं, तो यह न सिर्फ कानून का उल्लंघन है बल्कि प्रशासनिक संवेदनशीलता पर भी सवाल खड़े करता है।


इस घटना ने पुलिस की भूमिका पर भी बहस छेड़ दी है। जिस पुलिस विभाग की जिम्मेदारी बाल श्रम रोकने और बच्चों के अधिकारों की रक्षा करने की होती है, उसी विभाग के सामने बच्चों से इस तरह का काम करवाया जाना चिंताजनक माना जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी लोग इस घटना को लेकर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।


वहीं कुछ लोगों का यह भी कहना है कि जब्त शराब की पेटियाँ उतारने के लिए मजदूरों का इंतजाम करना कोई बड़ी बात नहीं थी। इसके बावजूद अगर बच्चों से यह काम करवाया गया, तो यह लापरवाही के साथ-साथ संवेदनहीनता को भी दर्शाता है।


फिलहाल इस मामले को लेकर प्रशासन की ओर से आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि वायरल हो रही तस्वीरों के बाद अब लोगों की नजरें जिला प्रशासन और पुलिस विभाग की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि अगर मामले की जांच में यह आरोप सही साबित होते हैं, तो संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ बाल श्रम कानून के तहत सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उनका मानना है कि कानून का पालन कराने वाली संस्थाओं को खुद कानून का पालन करने में सबसे आगे रहना चाहिए।


कटिहार के रौशना थाना से सामने आई यह घटना सिर्फ एक स्थानीय मामला नहीं रह गया है, बल्कि इसने पूरे सिस्टम की जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले की जांच किस तरह करता है और दोषियों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाते हैं।

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Tejpratap

रिपोर्टर / लेखक

Tejpratap

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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