Bihar News: शादी का कार्ड अक्सर लोग तारीख और जगह देखने के बाद भूल जाते हैं, लेकिन बिहार के गया जिले में एक शादी का कार्ड अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया है। यह कार्ड केवल शादी का निमंत्रण नहीं, बल्कि पक्षियों के संरक्षण का एक अहम संदेश भी दे रहा है। इस पहल की शुरुआत बागेश्वरी संजय नगर निवासी रंजन कुमार ने की है, जिन्होंने अपनी बहन सिम्पी कुमारी की शादी के निमंत्रण पत्र को एक जागरूकता अभियान का माध्यम बना दिया।
इस अनोखे शादी कार्ड के पहले पन्ने पर जहां एक ओर वैवाहिक कार्यक्रम का सामान्य विवरण है, वहीं दूसरी ओर लिखा गया है कि “आपसे निवेदन है कि इस तपती गर्मी के दिनों में अपने घर एवं ऑफिस की छत पर पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था अवश्य करें।”
यह संदेश लोगों को गर्मी में पक्षियों की पीड़ा का एहसास कराता है और उनके लिए कुछ करने को प्रेरित करता है। रंजन कुमार बताते हैं कि उन्हें यह प्रेरणा सोशल मीडिया पर विभिन्न जागरूकता कार्ड्स को देखकर मिली। जब वह अपनी बहन की शादी के कार्ड की छपाई करवा रहे थे, तभी उन्हें यह संदेश जोड़ने का विचार आया। उन्होंने बताया कि यह कदम सिर्फ एक संदेश भर नहीं है, बल्कि उनके लंबे समय से चल रहे पक्षी संरक्षण अभियान का हिस्सा है।
रंजन कुमार 2017 से "दाना-पानी लगाओ, पक्षियों को बचाओ" अभियान चला रहे हैं। उनका यह अभियान रामशिला पहाड़ी से लेकर बागेश्वरी इलाके तक फैला हुआ है, जहां पेड़ों और छतों पर खुले पिचड़े व सीकोरे लगाए गए हैं। उन्होंने बताया कि उनके लगाए गए 100 से अधिक पिचड़ों में से लगभग 70% अभी भी सक्रिय रूप से इस्तेमाल में हैं।
रंजन और उनकी टीम खुद दाना और पानी की व्यवस्था करते हैं। वह पीडीएस डीलर से मिलने वाला चावल भी पक्षियों को खिलाते हैं। इस कार्य में उनके दोस्त और आसपास के स्थानीय लोग भी सहायता करते हैं। गर्मी के मौसम में यह अभियान लगातार जारी रहता है। इस पहल की इलाके में काफी सराहना हो रही है। कई लोग अब खुद भी अपने छतों पर पक्षियों के लिए बर्तन रख रहे हैं। शादी के इस कार्ड ने समाज में एक सकारात्मक संदेश फैलाया है। अब अन्य जिलों में भी इस तरह के कार्ड की मांग और विचार शुरू हो गए हैं।
गौरतलब है कि देश के कई हिस्सों में लोग अपने वैवाहिक या पारिवारिक कार्यक्रमों में सामाजिक संदेश जोड़ रहे हैं। कहीं दहेज प्रथा के खिलाफ तो कहीं पर्यावरण संरक्षण को लेकर संदेश दिए जा रहे हैं। बिहार के गया से इस अनोखे पक्षी प्रेमी की पहल न केवल प्रशंसनीय है, बल्कि समाज में जागरूकता फैलाने का एक सफल उदाहरण भी बन चुकी है।





