Red Bird Air Ambulance : झारखंड के चतरा में हुए दर्दनाक एयर एंबुलेंस हादसे ने पटना के एक परिवार की खुशियां छीन लीं। इस विमान हादसे में सात लोगों की जान चली गई, जिनमें पटना के कुर्जी निवासी 24 वर्षीय पैरामेडिकल कर्मी सचिन कुमार मिश्रा भी शामिल थे। जैसे ही मंगलवार की शाम उनका पार्थिव शरीर पटना पहुंचा, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। मां बेटे का शव देखते ही बेसुध हो गईं और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था।
सचिन कुमार मिश्रा पिछले तीन वर्षों से ‘रेड बर्ड’ एयर एंबुलेंस में पैरामेडिकल स्टाफ के रूप में कार्यरत थे। वर्ष 2017 से वह नर्सिंग क्षेत्र से जुड़े थे। बीएससी नर्सिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने एयर एंबुलेंस सेवा से जुड़कर गंभीर मरीजों की सेवा को अपना लक्ष्य बनाया था। परिवार के अनुसार, सचिन मेहनती, जिम्मेदार और संवेदनशील स्वभाव के थे। कम उम्र में ही उन्होंने परिवार की जिम्मेदारियां संभाल ली थीं।
सचिन का बचपन संघर्षों में बीता। उनके पिता जितेंद्र मिश्रा का निधन तब हो गया था, जब वह काफी छोटे थे। पिता के साये के बिना पले-बढ़े सचिन को उनके बड़े भाई विनीत मिश्रा ने बेटे की तरह पाला। बड़े भाई पेशे से पुजारी हैं। मंझले भाई गुजरात में सेफ्टी ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं, जबकि सबसे छोटा भाई सेफ्टी ऑफिसर की पढ़ाई कर रहा है। एक बहन भी हैं। सचिन परिवार की उम्मीदों का केंद्र थे।
परिवार पिछले 20 वर्षों से पटना में रह रहा है। मूल रूप से सीवान जिले के तेलकथू गांव के रहने वाले इस परिवार का झारखंड से भी गहरा नाता रहा है। सचिन के नाना कुर्जी स्थित देवी स्थान में पुजारी थे। उनके निधन के बाद मामा वहां पूजा-अर्चना का कार्य संभाल रहे हैं। फिलहाल परिवार पटना के कुर्जी स्थित जय प्रकाश नगर में किराये के मकान में रहता है।
सोमवार की रात करीब एक बजे चतरा अस्पताल से हादसे की सूचना मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। मां खबर सुनते ही बेहोश हो गईं। परिजन उसी रात निजी वाहन से झारखंड के लिए रवाना हुए। मंगलवार की शाम सड़क मार्ग से सचिन का पार्थिव शरीर पटना लाया गया। कुर्जी में शव पहुंचते ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोग श्रद्धांजलि देने पहुंचे। पूरे इलाके में मातम पसरा रहा।
परिजनों ने आरोप लगाया कि हादसे के बाद ‘रेड बर्ड’ कंपनी की ओर से कोई अधिकारी सहायता के लिए आगे नहीं आया। झारखंड सरकार से भी अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने का आरोप लगाया गया। शव को पटना लाने की प्रक्रिया में परिवार को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। परिवार ने मांग की है कि ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले पैरामेडिकल कर्मियों को सम्मानजनक मुआवजा दिया जाए और हादसे की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
सचिन के बड़े भाई विनीत मिश्रा भावुक होकर कहते हैं, “पिता के जाने के बाद वही घर की उम्मीद था। मैंने उसे बेटे की तरह पाला और पढ़ाया। उसके बिना परिवार अधूरा हो गया।”इस हादसे में औरंगाबाद जिले के मदनपुर थाना क्षेत्र के मनिका निवासी डॉ. विकास कुमार गुप्ता की भी मौत हो गई। वे बजरंगी प्रसाद के पुत्र थे और रांची सदर अस्पताल में पदस्थापित थे। उनकी पत्नी मिनी राय स्टेट बैंक में कार्यरत हैं। उनका आठ वर्षीय पुत्र मोहुल कुमार है।
बजरंगी प्रसाद ने बताया कि उनके पुत्र ने ओडिशा के कटक से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की थी और वे समर्पित चिकित्सक के रूप में अपनी सेवा दे रहे थे।एयर एंबुलेंस हादसे ने कई परिवारों की दुनिया उजाड़ दी है। अब पीड़ित परिवार न्याय, मुआवजा और हादसे की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी दोबारा न हो।






