Bihar Transport Department : बिहार में नंबर प्लेट छुपाकर या उसमें छेड़छाड़ करके गाड़ी चलाने वालों के खिलाफ अब सख्त कार्रवाई शुरू हो गई है। परिवहन विभाग ने ऐसे वाहन चालकों पर नकेल कसने के लिए राज्यभर में विशेष जांच अभियान चला रखा है। विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जनवरी 2026 से अब तक पूरे बिहार में 1200 से अधिक गाड़ियों पर जुर्माना लगाया जा चुका है। इनमें सबसे ज्यादा मामले राजधानी पटना से सामने आए हैं, जहां अब तक 411 वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
परिवहन विभाग ने राज्य के सभी जिलों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि नंबर प्लेट में छेड़छाड़ करने वाले वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। विभाग का कहना है कि अगर किसी वाहन में नंबर प्लेट के साथ छेड़छाड़ या नियमों के खिलाफ प्लेट लगी हुई पाई जाती है तो सबसे पहले वाहन को जब्त किया जाएगा। इसके बाद मोटर वाहन अधिनियम के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
विभाग के अधिकारियों के अनुसार नंबर प्लेट से छेड़छाड़ का मामला सिर्फ ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन भर नहीं है, बल्कि यह कानून-व्यवस्था के लिए भी गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। कई आपराधिक घटनाओं में ऐसे वाहनों का इस्तेमाल किया जाता है जिनकी नंबर प्लेट स्पष्ट नहीं होती या उनमें बदलाव किया गया होता है। इससे पुलिस और प्रशासन के लिए अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
अधिकारियों का कहना है कि कई मामलों में देखा गया है कि अपराध में इस्तेमाल की गई गाड़ियों में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट नहीं लगी होती। जब ऐसी गाड़ियां किसी चेकपोस्ट या सड़क पर लगे सीसीटीवी कैमरों के सामने से गुजरती हैं तो उनका नंबर स्पष्ट रूप से पढ़ा नहीं जा पाता। इसी कमजोरी का फायदा उठाकर कई अपराधी कानून से बच निकलने की कोशिश करते हैं।
परिवहन विभाग की जांच में यह भी सामने आया है कि कई लोग जानबूझकर नंबर प्लेट के एक या दो अंकों को छिपाने की कोशिश करते हैं। इसके लिए वे नंबर प्लेट पर टेप, कागज, स्टिकर या अन्य सामग्री चिपका देते हैं। कुछ लोग नंबर प्लेट को इस तरह डिजाइन कराते हैं कि वह दूर से साफ दिखाई न दे। कई वाहनों में अब भी हाथ से लिखा हुआ नंबर प्लेट लगा हुआ पाया गया है, जो मोटर वाहन नियमों के अनुसार पूरी तरह अवैध है।
इतना ही नहीं, कुछ ऐसे मामले भी सामने आए हैं जिनमें वाहनों पर हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट तो लगी होती है, लेकिन उसके ऊपर स्टिकर, पोस्टर या अन्य चीजें चिपका दी जाती हैं। इससे नंबर साफ दिखाई नहीं देता और कैमरों में भी सही तरीके से कैद नहीं हो पाता। परिवहन विभाग ने ऐसे मामलों को भी गंभीरता से लिया है और इनके खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है।
विभाग के आंकड़ों के मुताबिक बिहार में अभी भी करीब 20 लाख से अधिक पुराने वाहन ऐसे हैं जिनमें हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट नहीं लगा है। नियमों के अनुसार 1 अप्रैल 2019 से पहले रजिस्टर हुई सभी गाड़ियों में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाना अनिवार्य है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में वाहन मालिकों ने अब तक यह नंबर प्लेट नहीं लगवाया है।
इसके अलावा लगभग 39 हजार ऐसे वाहन मालिक भी हैं जिन्होंने हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट बनवा तो लिया है, लेकिन उसे अपनी गाड़ी पर अभी तक नहीं लगाया है। विभाग का कहना है कि यह भी नियमों का उल्लंघन है और ऐसे वाहन मालिकों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
परिवहन विभाग ने सभी जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित जांच अभियान चलाएं और बिना हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट वाले वाहनों की पहचान करें। साथ ही जिन वाहनों में नंबर प्लेट के साथ छेड़छाड़ की गई है, उनके खिलाफ भी तुरंत कार्रवाई की जाए।
अधिकारियों का कहना है कि हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाने से न सिर्फ वाहनों की पहचान आसान होती है, बल्कि अपराध की जांच में भी काफी मदद मिलती है। इस नंबर प्लेट में विशेष सुरक्षा फीचर होते हैं, जिससे उसके साथ छेड़छाड़ करना आसान नहीं होता और नंबर को कैमरों के जरिए आसानी से पढ़ा जा सकता है।
परिवहन विभाग ने वाहन मालिकों से अपील की है कि वे अपनी गाड़ियों में नियमों के अनुसार हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट जरूर लगवाएं और किसी भी तरह की छेड़छाड़ से बचें। ऐसा नहीं करने पर उन्हें जुर्माना और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। विभाग का कहना है कि आने वाले दिनों में यह अभियान और तेज किया जाएगा ताकि राज्य में वाहनों की पहचान व्यवस्था को मजबूत किया जा सके और अपराध पर भी प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सके।





