Bihar Politics : बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए सोमवार को मतदान जारी है। सुबह 9 बजे से शुरू हुई वोटिंग में राज्य के सभी 243 विधायक शाम 4 बजे तक अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकेंगे। इसके बाद शाम 5 बजे से मतगणना शुरू होगी और आज ही नतीजों का ऐलान कर दिया जाएगा। इस बार राज्यसभा की पांच सीटों के लिए कुल छह उम्मीदवार मैदान में हैं, जिसकी वजह से चुनाव दिलचस्प हो गया है और पांचवीं सीट को लेकर सियासी मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है।
राज्यसभा चुनाव के दौरान विधानसभा परिसर में राजनीतिक हलचल तेज है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश में जुटे हुए हैं। मतदान के दौरान विधायकों को अपना वोट डालने के बाद अपनी पार्टी के अधिकृत प्रतिनिधि को यह दिखाना होता है कि उन्होंने किस उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया है। ऐसा नहीं करने पर वोट अमान्य भी हो सकता है।
इसी बीच नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने दावा किया है कि महागठबंधन इस चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करेगा। उन्होंने कहा कि “हम जीत रहे हैं और बीजेपी से हमेशा लड़ते रहेंगे।” तेजस्वी यादव ने कांग्रेस के दो विधायकों के गायब होने की खबरों को भी खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ अफवाह है और अफवाह फैलाना बीजेपी का काम है। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि विपक्ष को कमजोर दिखाने के लिए ऐसी खबरें फैलायी जा रही हैं।
वहीं एनडीए की ओर से राज्यसभा के लिए पांच उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, राष्ट्रीय लोक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा, केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर और बीजेपी के प्रदेश महामंत्री शिवेश राम शामिल हैं। राजनीतिक गणित के मुताबिक इन पांच उम्मीदवारों में से चार की जीत लगभग तय मानी जा रही है। नीतीश कुमार, नितिन नवीन, रामनाथ ठाकुर और उपेंद्र कुशवाहा के पास पर्याप्त समर्थन होने की वजह से उनकी जीत सुनिश्चित बताई जा रही है।
असल मुकाबला पांचवीं सीट को लेकर है। इस सीट के लिए एनडीए के उम्मीदवार शिवेश राम और महागठबंधन के उम्मीदवार एडी सिंह के बीच सीधी टक्कर मानी जा रही है। दोनों खेमों के बीच लगातार जोड़-तोड़ और रणनीति बन रही है ताकि अपने-अपने उम्मीदवार को जीत दिलाई जा सके।
विधानसभा में संख्या बल के लिहाज से एनडीए काफी मजबूत स्थिति में है। एनडीए के पास कुल 202 विधायक हैं, जिससे उसके चार उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही है। हालांकि पांचवें उम्मीदवार को जीत दिलाने के लिए एनडीए को अभी भी तीन वोटों की जरूरत पड़ सकती है। यही वजह है कि पांचवीं सीट को लेकर राजनीतिक हलचल और भी तेज हो गई है।
राज्यसभा चुनाव में एक सीट जीतने के लिए किसी भी उम्मीदवार को कम से कम 41 विधायकों के वोट की जरूरत होती है। इसी गणित के आधार पर सभी दल अपने विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश में लगे हुए हैं। किसी भी तरह की क्रॉस वोटिंग या अनुपस्थिति चुनाव के नतीजों को प्रभावित कर सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में इस बार राज्यसभा चुनाव सिर्फ औपचारिक नहीं है, बल्कि पांचवीं सीट के लिए सियासी प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। एनडीए जहां अपने पांचवें उम्मीदवार को जिताने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है, वहीं महागठबंधन भी इस सीट को जीतकर सत्ता पक्ष को कड़ा संदेश देना चाहता है।
अब सभी की नजरें शाम 5 बजे शुरू होने वाली मतगणना पर टिकी हुई हैं। वोटों की गिनती के बाद ही साफ हो पाएगा कि पांचवीं सीट पर किस गठबंधन का उम्मीदवार जीत हासिल करता है और बिहार की राजनीति में किसकी रणनीति कामयाब होती है।






