Bihar News: बिहार सरकार ने गेहूं के स्टॉक पर अब नई सीमा लागू कर दी है और इसका उद्देश्य सीधे तौर पर होर्डिंग रोकना और बाजार में कीमतों को नियंत्रित रखना है। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार ने सोमवार को सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। केंद्र सरकार के आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा-3 के तहत यह नियम 31 मार्च 2026 तक प्रभावी रहेगा।
इसके अनुसार थोक व्यापारी अधिकतम 2000 टन गेहूं रख सकेंगे, जबकि खुदरा विक्रेता प्रति आउटलेट 8 टन तक ही स्टॉक कर सकेंगे। बिग चेन रिटेलर भी प्रत्येक आउटलेट पर 8 टन ही रख सकेंगे। इससे ज्यादा स्टॉक मिलने पर कठोर कार्रवाई होगी और सभी इकाइयों को पोर्टल पर पंजीकरण कराना भी अनिवार्य है। त्योहारी सीजन से पहले गेहूं की कीमतों को स्थिर रखने में यह कदम काफी असरदार होगा।
स्टॉक लिमिट के नए नियम
- थोक व्यापारी/विक्रेता: अधिकतम 2000 मीट्रिक टन गेहूं रख सकेंगे। पहले यह सीमा 3000 MT थी लेकिन अब इसे कम कर दिया गया है।
- खुदरा विक्रेता: प्रत्येक आउटलेट पर 8 MT तक। पहले 10 MT की अनुमति थी।
- बिग चेन रिटेलर: प्रत्येक आउटलेट पर 8 MT।
- प्रोसेसर (मिलर): मासिक इंस्टॉल्ड कैपेसिटी के 60% तक जो कि पहले 70% था।
वहीं, अगर किसी इकाई के पास तय सीमा से ज्यादा गेहूं पाया जाता है तो उसे 15 दिनों के अंदर स्टॉक घटाना होगा। इसका उल्लंघन करने पर आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 6 और 7 के तहत सजा हो सकती है। सभी व्यापारियों को https://foodstock.dfpd.gov.in पोर्टल पर पंजीकरण भी कराना और हर शुक्रवार को स्टॉक पोजीशन भी अपडेट करनी होगी।
सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे स्थानीय स्तर पर पंजीकरण अभियान चलाएँ, साप्ताहिक स्टॉक रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड करें। पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर जैसे कई जिलों में विशेष टीम गठित की गई है और उल्लंघन पर जुर्माना देना पड सकता है या जेल की हवा काटनी पड़ सकती है।






