Budget Session 2026 : बिहार सरकार ने पिछले कई वर्षों में राज्य में कानून-व्यवस्था, महिलाओं के सशक्तिकरण और साम्प्रदायिक सद्भावना को मजबूत करने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। 24 नवंबर 2005 को नई सरकार बनने के बाद राज्य में कई पहलें तेजी से लागू की गईं, जिससे बिहार में कानून का राज स्थापित हुआ और आम जनता को सुरक्षा का भरोसा मिला।
कानून-व्यवस्था में सुधार:
नई सरकार के गठन से पहले बिहार में कानून-व्यवस्था की स्थिति कमजोर थी। अपराध नियंत्रण के लिए कोई ठोस योजना नहीं थी, पुलिस बल की संख्या भी कम थी और जनता में सुरक्षा का भरोसा नहीं था। लेकिन सरकार ने तुरंत इस दिशा में काम शुरू किया। अब राज्य में अपराध पर नियंत्रण पाया गया है और कानून का राज स्थापित हुआ है। पुलिस बल को मजबूती देने के लिए उनकी संख्या बढ़ाकर 1 लाख 30 हजार कर दी गई है। इसके साथ ही, महिलाओं के प्रति अपराधों को रोकने के लिए महिला पुलिस बल की संख्या में भी वृद्धि की गई है। राज्य में महिला पुलिस बल की संख्या देश में सबसे ज्यादा है, जो महिलाओं की सुरक्षा को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
सांप्रदायिक सद्भाव और सुरक्षा:
बिहार में सामाजिक और धार्मिक सद्भाव बनाए रखने पर भी सरकार ने विशेष ध्यान दिया है। राज्य में मुस्लिम समुदाय के कब्रिस्तानों की सुरक्षित घेराबंदी योजना साल 2006 से लागू की गई। संवेदनशील क्षेत्रों के कब्रिस्तानों को भी सुरक्षा दी गई, जिससे समाज में शांति और साम्प्रदायिक सद्भाव का माहौल कायम हुआ। इसी तरह, राज्य के हिंदू मंदिरों में चोरी और अन्य अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए मंदिरों की सुरक्षा और घेराबंदी की गई। इन पहलों से धार्मिक स्थलों और समाज में सुरक्षा एवं भरोसे का वातावरण बन पाया है।
महिलाओं को सशक्त बनाने की योजनाएँ:
बिहार सरकार ने महिलाओं के सशक्तिकरण और आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए कई योजनाएँ लागू की हैं। मुख्यमंत्री रोजगार योजना के तहत हर घर की एक महिला को 10 हजार रुपए की आर्थिक मदद दी गई। जिन महिलाओं का रोजगार अच्छा चलता है, उन्हें अतिरिक्त 2 लाख रुपए तक की सहायता भी दी जाती है। इसका उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारना है।
इसके अलावा, महिलाओं के सामूहिक विकास और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए स्वयं सहायता समूह (SHG) बनाए गए हैं। पहले बिहार में स्वयं सहायता समूहों की संख्या बहुत कम थी, लेकिन अब यह संख्या लगभग 11 लाख तक पहुंच गई है। जीविका दीदियों की संख्या भी बढ़कर 1 करोड़ 40 लाख हो गई है। शहरों में स्वयं सहायता समूहों की संख्या 41 हजार हो गई है। इन समूहों के माध्यम से महिलाएं आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक रूप से मजबूत हुई हैं।
सरकार की योजनाओं का असर:
इन पहलों का सीधा असर समाज पर देखने को मिल रहा है। कानून-व्यवस्था में सुधार के कारण अपराध घटे हैं और लोग सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। महिला सशक्तिकरण और आर्थिक मदद के कारण महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं और उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति बेहतर हो रही है। साम्प्रदायिक सद्भाव और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा से समाज में शांति कायम हुई है।
कुल मिलाकर, बिहार सरकार ने पिछले वर्षों में कानून-व्यवस्था, महिला सशक्तिकरण और साम्प्रदायिक सद्भाव के क्षेत्र में मजबूत कदम उठाए हैं। इन पहलों से राज्य में सामाजिक शांति, आर्थिक विकास और सुरक्षा की भावना बढ़ी है। आने वाले वर्षों में इन योजनाओं को और व्यापक रूप देने के लिए सरकार निरंतर काम कर रही है, जिससे बिहार को विकास और सुरक्षा का आदर्श राज्य बनाया जा सके।




