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शिक्षक नियोजन में नीतीश सरकार की दोहरी नीति, आर्थिक रूप से पिछड़े अभ्यर्थियों को छोड़ रिजर्व कैटेगरी को अंकों में दी छूट

PATNA : बिहार में आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण लागू करने वाली नीतीश सरकार ने अब इस तबके के साथ बड़ा भेदभाव किया है। शिक्षक नियोजन प्रक्रिया में आर्थिक रूप से पिछड़े अभ्यर्थ

शिक्षक नियोजन में नीतीश सरकार की दोहरी नीति, आर्थिक रूप से पिछड़े अभ्यर्थियों को छोड़ रिजर्व कैटेगरी को अंकों में दी छूट
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PATNA : बिहार में आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण लागू करने वाली नीतीश सरकार ने अब इस तबके के साथ बड़ा भेदभाव किया है। शिक्षक नियोजन प्रक्रिया में आर्थिक रूप से पिछड़े अभ्यर्थियों को छोड़कर रिजर्व कैटेगरी के बाकी अन्य अभ्यर्थियों के लिए सीटेट के अंको में छूट दी है। शिक्षा विभाग ने सभी नियोजन इकाइयों को यह निर्देश दिया है कि अनुसूचित जाति जनजाति, महिला और दिव्यांग कैटेगरी के अभ्यर्थियों के लिए सीटेट के 55 फीसदी अंकों पर प्रारंभिक शिक्षक नियोजन में भाग लेने की अनुमति दी जाए। हालांकि शिक्षा विभाग के फैसले में आर्थिक रूप से पिछड़े अभ्यर्थियों के लिए किसी छूट की बात नहीं कही गई है। सरकार के इस फैसले से आर्थिक आधार पर आरक्षण पाने वाले अभ्यर्थियों में खासी नाराजगी है। नियमों के मुताबिक केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था सीबीएससी सीटेट में 60 फ़ीसदी अंक लाने वाले छात्रों को क्वालिफाई मानती है लेकिन सीबीएसई ने यह गाइडलाइन जारी कर रखी है कि अगर कोई नियोजन इकाई चाहे स्थानीय आरक्षण नियमों के मुताबिक में कमी कर सकती है। बिहार सरकार ने इसी गाइडलाइन के तहत आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिए अंकों का प्रतिशत कम किया है। https://youtu.be/2LPybWaG4SM
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FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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